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पीलीभीत: रात का सन्नाटा कोहरे की चादर, शारदा में गिरी कार, देवदूत बने साधू, बचाई लोगों की जान

पीलीभीत में घने कोहरे के बीच शारदा नदी में गिरी कार, साधुओं की सूझबूझ से चार युवकों की जान बची, हवा गति से मौके पर पहुंची पुलिस

कोहरे की चादर, उफनती शारदा और मौत का सन्नाटा… लेकिन घाट पर बैठे साधु बने चार जिंदगियों के रक्षक

पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) 
शुक्रवार देर रात अगर ज़रा-सी भी देर हो जाती, तो शारदा नदी एक और दर्दनाक हादसे की गवाह बन जाती। घना कोहरा, सूनसान घाट और अंधेरे में भटकती एक कार… अगले ही पल गाड़ी सीधे शारदा नदी में समा गई। पानी, ठंड और अंधेरे के बीच चार युवक ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे।
लेकिन कहते हैं न — जब ऊपर वाला चाहता है, तो इंसान देवदूत बनकर सामने आ ही जाता है।

खटीमा से शारदा पार जा रहे थे युवक, कोहरे ने रास्ता निगल लिया

पूरा मामला पीलीभीत जिले के शारदा नदी के धनाराघाट का है।
लखीमपुर खीरी के सम्पूर्णानगर निवासी चार युवक —
अर्जुन गुप्ता, अभिषेक गुप्ता, आदित्य वर्मा और अनंत रघुवंशी
शुक्रवार रात उत्तराखंड के खटीमा कस्बे से शारदा नदी पार कर अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे।

रात गहराती जा रही थी और उसी के साथ कोहरे की चादर और भी घनी होती चली गई। दृश्यता लगभग शून्य हो चुकी थी। इसी दौरान चालक को घाट का अंदाज़ा नहीं हुआ और कार सीधे शारदा नदी में जा गिरी

नदी में डूबी कार, छत पर चढ़कर बचाई जान

जैसे ही कार नदी में गिरी,  अफरा-तफरी मच गई। चार युवकों में ठंडे पानी और तेज़ बहाव के बीच किसी तरह उन्होंने हिम्मत दिखाई और कार की छत पर चढ़कर अपनी जान बचाई
चारों युवक मदद के लिए चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन देर रात होने के कारण पूरा इलाका सन्नाटे में डूबा था। दूर-दूर तक कोई हलचल नहीं, कोई वाहन नहीं, कोई इंसान नहीं।

घने कोहरे और बहती नदी के बीच हर गुजरता पल मौत को और करीब ला रहा था।

घाट पर कल्पवास कर रहे साधु बने ‘देवदूत’

इसी घाट पर कल्पवास कर रहे साधु बाबा राघवदास को युवकों की आवाज़ सुनाई दी। अंधेरे और कोहरे के बावजूद उन्होंने बिना देर किए आसपास मौजूद लोगों को आवाज़ दी।
साधु और स्थानीय लोग तुरंत हरकत में आए।

बांस और लकड़ियों के सहारे बेहद जोखिम भरे हालात में रेस्क्यू शुरू किया गया। ठंड, पानी और तेज बहाव के बावजूद एक-एक कर चारों युवकों को सुरक्षित नदी से बाहर निकाला गया

मुंशी बबलू मांझी की बहादुरी, फिर साबित हुआ जज़्बा

रेस्क्यू ऑपरेशन में धनाराघाट पुल पर तैनात मुंशी बबलू मांझी की भूमिका भी बेहद अहम रही।
स्थानीय लोग बताते हैं कि बबलू मांझी इससे पहले भी करीब दो दर्जन लोगों की जान बचा चुके हैं
इस बार भी उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए युवकों को सुरक्षित बाहर निकालने में पूरा सहयोग किया।

भीषण ठंड में कांप रहे थे युवक, साधु की कुटिया बनी सहारा

नदी से बाहर निकलने के बाद चारों युवक भीषण ठंड में बुरी तरह कांप रहे थे। ऐसे में साधु बाबा राघवदास उन्हें अपनी कुटिया में ले गए।
वहाँ आग जलाकर उन्हें गर्म किया गया, सूखे कपड़े दिए गए और प्राथमिक राहत पहुंचाई गई।

इसके बाद पूरे मामले की सूचना हज़ारा पुलिस को दी गई।

पुलिस मौके पर पहुंची, युवकों को घर भिजवाया

थानाध्यक्ष शरद यादव का बयान

सूचना मिलते ही हज़ारा थाना पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई। स्थानीय लोगों और घाट पर मौजूद साधुओं की सतर्कता व मानवता भरे प्रयासों से चारों युवकों को समय रहते शारदा नदी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पुलिस ने रेस्क्यू के बाद युवकों की पूरी तरह देखभाल कराते हुए उन्हें सुरक्षित उनके घर तक भिजवाने की समुचित व्यवस्था की। इस पूरे अभियान में पुलिस, स्थानीय नागरिकों और साधु-संतों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला, जिसकी बदौलत एक बड़ा हादसा टल गया।

धनाराघाट बना हादसों का हॉटस्पॉट

गौर करने वाली बात यह है कि धनाराघाट पर कोहरे के चलते पहले भी कई हादसे हो चुके हैं
स्थानीय लोगों का कहना है कि

घाट पर पर्याप्त चेतावनी संकेत नहीं हैं

कोहरे में रास्ता साफ दिखाई नहीं देता

रात के समय सुरक्षा इंतज़ाम बेहद कमजोर हैं

इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

कार को निकालने की कवायद जारी

फिलहाल कार शारदा नदी में डूबी हुई है और उसे बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं। प्रशासनिक स्तर पर मशीनरी मंगवाने की तैयारी की जा रही है।

एक सबक, एक सवाल

यह घटना सिर्फ़ एक हादसा नहीं, बल्कि चेतावनी है
कोहरा, नदी घाट और रात का सफर…
थोड़ी-सी लापरवाही ज़िंदगी छीन सकती है।

अगर उस रात घाट पर साधु न होते,
अगर बबलू मांझी जैसी हिम्मत न होती,
तो चार परिवार आज मातम में डूबे होते।