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UP News: काशी गंगा में इफ्तार से मचा सियासी बवाल!, अखिलेश यादव ने कहा – “हथेली गरम तो पुलिस नरम”, फिर..

UP News: काशी गंगा में इफ्तार से मचा सियासी बवाल!, अखिलेश यादव ने कहा - "हथेली गरम तो पुलिस नरम", फिर..

UP News: वाराणसी (काशी) में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार करने का मामला अब सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। वहीं, भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बयान भी सामने आए हैं, जिससे यह मुद्दा और गरमा गया है।

अखिलेश यादव का सीधा सवाल—क्या गंगा में इफ्तार नहीं कर सकते?

लखनऊ में एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या गंगा में इफ्तार करना गलत है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन को कार्रवाई करने के बजाय डीएम, एसपी और एसओ को खुद जाकर इफ्तारी देनी चाहिए थी।

अखिलेश यहीं नहीं रुके। उन्होंने “हथेली गरम तो पुलिस नरम” वाला बयान देते हुए सीधे तौर पर इशारा किया कि अगर रिश्वत दी जाती तो शायद यह कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने इस पूरे मामले को लोगों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश बताया और कहा कि प्रशासन सरकार को खुश करने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है।

साथ ही उन्होंने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब गंगा में एक 5-स्टार जहाज चल रहा था, जिसमें शराब रखी थी और उसका वेस्ट नदी में जा रहा था, तब उस पर क्या कार्रवाई हुई? उन्होंने कहा कि उस समय गंगा को प्रदूषित करने वालों पर कोई सख्ती नहीं दिखाई गई, लेकिन अब इफ्तार करने पर तुरंत कार्रवाई हो गई।

आखिर क्या हुआ था उस दिन?

सोमवार (16 मार्च) को वाराणसी में गंगा नदी के बीच एक नाव पर कुछ युवकों ने इफ्तार किया। इस दौरान फल और मेवों के साथ चिकन बिरयानी भी परोसी गई।

इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया, जो तेजी से वायरल हो गया। जैसे ही वीडियो सामने आया, हिंदूवादी संगठनों ने इसे गंगा की पवित्रता से जोड़ते हुए विरोध शुरू कर दिया।

8 घंटे में पुलिस एक्शन, 14 युवक गिरफ्तार

वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए महज 8 घंटे के भीतर 14 युवकों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए सभी युवक मदनपुरा के ताड़तल्ला इलाके के रहने वाले हैं और एक ही परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनकी उम्र 19 से 25 साल के बीच है और ये “बाबू बीड़ी वाले” नाम से मशहूर घराने से ताल्लुक रखते हैं।

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है, जिनमें धार्मिक भावनाएं आहत करना, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना और गंगा जैसे सार्वजनिक जल स्रोत को प्रदूषित करने जैसी धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 24 भी लगाई गई है।

कांग्रेस नेताओं ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस कार्रवाई को लेकर यूपी पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पुलिस मुसलमानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में उतावली दिखा रही है और कानून का दुरुपयोग हो रहा है।

वहीं इमरान मसूद ने कहा कि गंगा में जो नाले गिर रहे हैं, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। सिर्फ इस तरह की घटनाओं पर सख्ती दिखाना सही नहीं है।

भाजपा का जवाब—गंगा की पवित्रता सर्वोपरि

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि गंगा की पवित्रता का एक अलग धार्मिक महत्व है और इसे किसी भी तरह से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि गंगा में इफ्तार करना और वहां बिरयानी के अवशेष डालना लोगों की भावनाओं को आहत करता है और यह भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।

मुस्लिम समाज के अंदर से भी आई आलोचना

इस मामले पर मुस्लिम पक्ष के भीतर से भी आवाज उठी है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा कि इस्लाम में इस तरह नाव पर इफ्तार करने की कोई परंपरा नहीं है। उन्होंने इसे “जाहिलाना हरकत” बताते हुए कहा कि इससे धर्म की छवि खराब होती है और ऐसे लोगों की वजह से विवाद पैदा होता है।

मामला क्यों बना इतना बड़ा?

यह पूरा विवाद सिर्फ एक इफ्तार पार्टी तक सीमित नहीं है। इसमें गंगा की पवित्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, कानून का इस्तेमाल और राजनीतिक बयानबाजी—सभी पहलू जुड़ गए हैं।

एक तरफ पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराया जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे भेदभाव और राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।