UP Fake Currency: उत्तर प्रदेश में नकली नोटों के बड़े नेटवर्क का खुलासा होते ही सियासत गरमा गई है। देवरिया के विवेक यादव का नाम सामने आने के बाद अब मामला सिर्फ क्राइम नहीं रहा, बल्कि BJP और SP के बीच सीधा राजनीतिक टकराव बन गया है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोपी से संबंध होने के आरोप लगा रही हैं।
BJP vs SP: कौन किसे बता रहा अपना?
सियासत की शुरुआत तब हुई जब BJP नेताओं ने विवेक यादव को सपाई बताया। वहीं, समाजवादी पार्टी ने पलटवार करते हुए उसे BJP से जोड़ दिया।
इस पूरे विवाद में Akhilesh Yadav ने भी एंट्री ली और देवरिया के BJP विधायक Shalabh Mani Tripathi पर सवाल खड़े किए।
फोटो वॉर: सोशल मीडिया पर सबूतों की जंग
सपा ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें नकली नोट केस में पकड़े गए लड़के BJP विधायक शलभमणि के साथ नजर आ रहे थे।
सपा ने सवाल उठाया कि:
- ये लोग विधायक के साथ क्या कर रहे थे?
- क्या उनसे पूछताछ होगी?
इसके जवाब में BJP नेताओं ने भी विवेक की SP नेताओं के साथ तस्वीरें शेयर करनी शुरू कर दीं।
अखिलेश यादव का हमला
Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब सबूत सामने हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? उन्होंने सीधे तौर पर BJP विधायक से पूछताछ की मांग की।
BJP विधायक का जवाब
Shalabh Mani Tripathi ने सफाई देते हुए कहा:
- विवेक यादव एक कार्यक्रम का निमंत्रण देने आया था
- फोटो खिंचवाना आम बात है
- वह सपा से जुड़ा हुआ व्यक्ति है
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में अखिलेश यादव को अपने कार्यकर्ताओं को समझाना चाहिए।
सपा ने झाड़ा पल्ला
देवरिया सपा जिलाध्यक्ष व्यास यादव ने साफ कहा कि:
- विवेक यादव पार्टी का न पदाधिकारी है
- न ही कार्यकर्ता
उन्होंने इसे सपा की छवि खराब करने की साजिश बताया।
कैसे पकड़ा गया नकली नोटों का नेटवर्क?
30 मार्च को पुलिस ने भदोही और देवरिया के 4 युवकों को पकड़ा। उनके पास से 1.80 लाख रुपए के नकली नोट मिले:
- 1 लाख रुपए के 500 के नोट
- बाकी 100 और 200 के नोट
कार में नकली नोट बनाने का कागज भी मिला। पूछताछ में विवेक यादव का नाम मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया।
साइबर कैफे में छपते थे नकली नोट
जांच में सामने आया कि:
- देवरिया में साइबर कैफे की आड़ में नोट छापे जाते थे
- धर्मेंद्र यादव नोट प्रिंट करता था
- नरेंद्र उर्फ विराट नोट सप्लाई करता था
- भदोही के लड़के बाजार में नोट चलाते थे
नोट प्रयागराज और वाराणसी तक सप्लाई किए जा रहे थे।
अंडरग्राउंड हुआ विवेक, वीडियो जारी
पुलिस के पहुंचने से पहले ही विवेक यादव फरार हो गया।
उसने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताया और कहा कि:
- उसे राजनीतिक साजिश में फंसाया जा रहा है
- वह सपा का कार्यकर्ता है
अचानक बदली लाइफस्टाइल ने बढ़ाया शक
स्थानीय लोगों के अनुसार:
- 2021 के बाद विवेक की लाइफस्टाइल बदल गई
- स्कॉर्पियो, हंटर जीप और बुलेट जैसी गाड़ियां खरीदीं
- बड़े काफिले के साथ चलता था
- पार्टियां और इवेंट्स करता था
गांव के लोग भी समझ नहीं पा रहे थे कि पैसा कहां से आ रहा है।
चुनाव में हार, फिर भी बना एक्टिव
विवेक ने 2021 में जिला पंचायत चुनाव लड़ा:
- सिर्फ 892 वोट मिले
- 9वें स्थान पर रहा
- जमानत जब्त हो गई
इसके बाद उसने दूसरे वार्ड में सक्रियता बढ़ा दी।
सोशल मीडिया पर सपा सपोर्ट
विवेक के सोशल मीडिया पोस्ट में:
- Akhilesh Yadav
- Mulayam Singh Yadav
- Shivpal Singh Yadav
की तस्वीरें दिखती थीं। वह सपा के लिए प्रचार भी करता था।
पुलिस की जांच और इनाम घोषित
IPS अधिकारी Kuldeep Singh Gunawat के मुताबिक:
- विवेक यादव मुख्य आरोपी है
- 25 हजार का इनाम घोषित किया गया है
- गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई हैं
अब भी कई सवाल बाकी
- नेटवर्क कितने जिलों में फैला है?
- और कितने लोग शामिल हैं?
- कितने नकली नोट बाजार में पहुंच चुके हैं?
पुलिस का कहना है कि विवेक की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा।
सियासत या सच्चाई?
इस केस में जहां एक तरफ बड़ा नकली नोट गिरोह सामने आया है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। असली सच्चाई क्या है—यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा।
इस खबर की मूल रिपोर्टिंग का श्रेय Dainik Bhaskar को जाता है, जहां से यह जानकारी प्राप्त की गई है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).