Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तथा कांग्रेस नेता डॉ. उदित राज को उत्तर प्रदेश के बदायूं से बड़ी कानूनी राहत मिली है। बदायूं की सेशन कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर निगरानी (रिवीजन) याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) द्वारा पहले पारित आदेश पूरी तरह कानून के अनुरूप था और उसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या अनियमितता नहीं पाई गई। इस फैसले के बाद राहुल गांधी और डॉ. उदित राज के खिलाफ इस मामले में राहत बरकरार रही।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अधिवक्ता जय सिंह सागर द्वारा दायर की गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस नेता डॉ. उदित राज ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
इसी शिकायत में राहुल गांधी को भी पक्षकार बनाया गया था और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पहले ही खारिज कर दी थी शिकायत
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने शिकायत को खारिज कर दिया था।
अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि इस मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार संबंधित न्यायालय को प्राप्त नहीं है। साथ ही उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया कोई संज्ञेय अपराध भी नहीं बनता।
सेशन कोर्ट में दायर हुई निगरानी (रिवीजन) याचिका
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देते हुए शिकायतकर्ता की ओर से बदायूं सेशन कोर्ट में निगरानी (रिवीजन) याचिका दायर की गई।
इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट-प्रथम) सुश्री अनीता की अदालत में हुई।
बचाव पक्ष ने अदालत में क्या दलील दी?
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत मिश्रा और डॉ. उदित राज की ओर से अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने पक्ष रखा।
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि राहुल गांधी को बिना किसी प्रत्यक्ष साक्ष्य के केवल निराधार आरोपों के आधार पर मामले में शामिल किया गया। शिकायतकर्ता यह भी स्पष्ट नहीं कर सका कि कथित बयान कब, कहां और किस माध्यम से सुना या देखा गया।
वकीलों ने दलील दी कि ऐसे में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश पूरी तरह विधिसम्मत और कानून के अनुरूप है।
अदालत ने क्यों खारिज की याचिका?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
बाद में अदालत ने निगरानी (रिवीजन) याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का पूर्व आदेश पूरी तरह सही और विधिसम्मत है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
फैसले के बाद क्या बोले वरिष्ठ अधिवक्ता?
फैसले के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत मिश्रा ने कहा कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निष्पक्ष फैसला सुनाया है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय न्यायपालिका की निष्पक्षता और विधि के शासन में लोगों के विश्वास को और मजबूत करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका संविधान की सर्वोच्च संरक्षक है और हर नागरिक को निष्पक्ष न्याय मिलने का भरोसा बना रहना चाहिए।
सुनवाई के दौरान कई कांग्रेस पदाधिकारी रहे मौजूद
मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष आसिफ जमा रिजवी, प्रदेश सचिव दीपक मिश्रा, जिला अध्यक्ष सूरजपाल सिंह सोलंकी, सुधीर कुमार मिश्रा, मुनेंद्र कनौजिया, गोपाल पांडे, ज़कीर खान सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और अधिवक्ता अदालत में मौजूद रहे।
अदालत के फैसले का क्या मतलब है?
सेशन कोर्ट के इस फैसले के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा शिकायत खारिज करने का आदेश बरकरार रहेगा। फिलहाल इस मामले में राहुल गांधी और डॉ. उदित राज को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने साफ कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी पहलुओं को देखते हुए निगरानी याचिका में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं था।