Dharmendra Pradhan Resign: देश में पिछले कई हफ्तों से NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग यही थी कि NEET पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक लंबा खुला पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने फैसले की वजह बताते हुए छात्रों, युवाओं और देश के नाम भावुक संदेश लिखा।
शिक्षा मंत्री ने चार दशक की शिक्षा यात्रा का किया जिक्र
अपने पत्र की शुरुआत में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने लिखा कि उनका हमेशा से विश्वास रहा है कि एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव होती है।
उन्होंने देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का सम्मान करते हुए कहा कि भारत के युवाओं के सपनों को पूरा करना उनके सार्वजनिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जताया आभार
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर उनके लिए गर्व की बात रही और वह इसके लिए सदैव आभारी रहेंगे।
NEET-UG 2026 परीक्षा में अनियमितताओं का किया जिक्र
पत्र में उन्होंने 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही मामले की जानकारी मिली, केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी।
इसके साथ ही परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया और दोबारा परीक्षा आयोजित करने की नई तारीख घोषित की गई। उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष से NEET परीक्षा को पूरी तरह Computer-Based Test (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया गया है।
20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा कराना थी सबसे बड़ी प्राथमिकता
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इस पूरे विवाद के बीच सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को सफलतापूर्वक आयोजित कराना था।
उन्होंने बताया कि “Whole of Government Approach” के तहत केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
बोले- पहले दिन से मैंने जिम्मेदारी ली
अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट लिखा कि उन्होंने पहले ही दिन इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की थी और कभी भी इस स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया की वजह से खराब न हो और किसी भी छात्र के साथ अन्याय न होने पाए।
NEET रिजल्ट को बताया संतोषजनक
धर्मेंद्र प्रधान ने 16 जुलाई को घोषित NEET-UG 2026 के परिणामों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि परिणाम संतोषजनक रहे और गरीब एवं साधारण परिवारों से आने वाले कई प्रतिभाशाली छात्रों ने इस परीक्षा में सफलता हासिल की।
जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों पर लगाया आरोप
पत्र में उन्होंने यह भी लिखा कि पूरे विवाद के दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और बाधाएं उत्पन्न करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी दुख पहुंचा।
पिछले 10 दिनों की घटनाओं से बताया खुद को आहत
धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले 10 दिनों में जो घटनाक्रम सामने आए, उनसे उनका मन बेहद दुखी हुआ।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और उनके भविष्य का सवाल है।
युवाओं को भ्रम से बचाने की कही बात
उन्होंने कहा कि भारत की युवाशक्ति ही देश की सबसे बड़ी ताकत है और उन्हें किसी भी तरह के भ्रम या भटकाव का शिकार नहीं बनने देना चाहिए।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि युवाओं को भ्रम के कुचक्र में फंसने से बचाना उनका संकल्प रहेगा।
राष्ट्रहित और छात्रों के भविष्य का हवाला देकर दिया इस्तीफा
अपने इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह बताते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जंतर-मंतर और देशभर में जो माहौल बना है, उसका फायदा राष्ट्रविरोधी ताकतें न उठा सकें, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया।
उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि देश के छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में उलझे या उनका कीमती समय आंदोलन और अनिश्चितता में बीते। छात्रों को अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहिए। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया।
सहयोगियों और मंत्रालय का भी जताया आभार
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री के साथ-साथ मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और उन सभी लोगों का भी धन्यवाद किया जिनके साथ उन्हें काम करने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और आगे भी वह इसी भावना से देश की सेवा करते रहेंगे।
भगवान जगन्नाथ का लिया आशीर्वाद
पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रभु श्रीजगन्नाथ का स्मरण करते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद से वह भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हरसंभव प्रयास करते रहेंगे।