NEET Protest: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एक दिलचस्प राजनीतिक तथ्य सामने आया है। 2014 में नरेंद्र मोदी के पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद से 12 साल के कार्यकाल में सिर्फ दो केंद्रीय मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है। इनमें पहला नाम एम.जे. अकबर का है, जबकि दूसरा नाम अब धर्मेंद्र प्रधान का जुड़ गया है। हालांकि, दोनों इस्तीफों की परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं।
धर्मेंद्र प्रधान बने मोदी सरकार के दूसरे इस्तीफा देने वाले मंत्री
NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद और उसे लेकर देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जंतर-मंतर पर 36 दिनों से प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में उनका इस्तीफा भी शामिल था। इस्तीफे के बाद CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) ने इसे अपनी पहली बड़ी जीत बताया।
धर्मेंद्र प्रधान से पहले सिर्फ एम.जे. अकबर ने छोड़ा था मंत्री पद
धर्मेंद्र प्रधान से पहले मोदी सरकार में सिर्फ एम.जे. अकबर ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
एम.जे. अकबर विदेश राज्य मंत्री थे। अक्टूबर 2018 में दुनियाभर में चल रहे #MeToo आंदोलन के दौरान उन पर पत्रकारिता के दिनों से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। आरोप सामने आने के बाद उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया था।
हालांकि, अकबर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें झूठा बताया था। उन्होंने कहा था कि वह व्यक्तिगत क्षमता में अदालत में अपनी कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं। बाद में उन्होंने आरोप लगाने वाली पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था।
दोनों इस्तीफों में क्या है सबसे बड़ा अंतर?
एम.जे. अकबर का इस्तीफा व्यक्तिगत आरोपों के बाद आया था, जबकि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET विवाद और लंबे समय तक चले छात्र आंदोलन के बीच हुआ है।
यही वजह है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को राजनीतिक गलियारों में अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
अभिजीत दीपके बोले- ‘कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते’
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों का यह दावा गलत साबित हुआ कि इस सरकार में कोई मंत्री इस्तीफा नहीं देता।
उन्होंने कहा,
“क्या कहते थे… इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगें अभी बाकी हैं।”
‘सुबह हो गई मामू, जनता जाग गई’
दीपके ने अपने संबोधन में कहा,
“सुबह हो गई मामू, जनता जाग गई। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।”
उन्होंने कहा कि संगठन का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उनकी बाकी मांगों पर भी फैसला नहीं लेती।
CJP की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी
अभिजीत दीपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की पहली सफलता है, लेकिन अभी दो अहम मांगें बाकी हैं।
उन्होंने मांग रखी कि:
- NEET विवाद से जुड़े आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
- प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो और छात्रों पर दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएं।
‘हमने एक मंत्री का इस्तीफा ले लिया’
अपने संबोधन में दीपके ने कहा,
“हमने तो एक मंत्री का इस्तीफा ले लिया, तो तुम लोग क्या चीज हो। छात्रों पर केस वापस होने चाहिए। भैया, ये लोकतंत्र है। मुझे एक महीने से लोग कहते थे कि ये इस्तीफा नहीं देंगे, मगर हमने कर दिखाया।”
उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन की पहली बड़ी जीत है और बाकी मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).