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UP News: जज ने 5 महीने में 23 को दी फांसी, बोले – ‘डरपोक कहलाना मंजूर नहीं’, कहा – ‘इस्लामिक कट्टरपंथी दे रही धमकियां’

UP News: जज ने 5 महीने में 23 को दी फांसी, बोले - ‘डरपोक कहलाना मंजूर नहीं’, कहा - 'इस्लामिक कट्टरपंथी दे रही धमकियां'

UP News: मुजफ्फरनगर की अदालत ने शाहपुर शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार, 7 सितंबर को फैसला सुनाते हुए नदीम पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। हालांकि, इस फैसले से ज्यादा चर्चा जज रवि कुमार दिवाकर की उन टिप्पणियों की हो रही है, जो उन्होंने अपने फैसले में लिखीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह डरकर न्याय करने वाले जज के तौर पर नहीं पहचाने जाना चाहते। उन्होंने लिखा कि जब तक वह अपने सिद्धांतों पर चल सकते हैं, तब तक सेवा करेंगे, वरना इस्तीफा देना बेहतर समझेंगे।

‘मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नहीं’

जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसले में लिखा, “मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नहीं।” उन्होंने कहा कि जब तक वह अपने सिद्धांतों के अनुसार काम कर सकते हैं, तब तक न्यायिक सेवा में रहेंगे। अगर कभी ऐसा लगा कि वह दबाव में काम कर रहे हैं तो इस्तीफा देना ही उचित होगा।

‘जब तक जज की कुर्सी पर हूं, फैसला लेने का अधिकार मेरा’

फैसले में जज ने यह भी लिखा कि जब तक वह जज की कुर्सी पर हैं, तब तक फैसला लेने का अधिकार भी उनका ही होगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जनता का अदालत पर भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है।

माता-पिता ने सिखाया- भगवान से डरो, किसी और से नहीं

जज दिवाकर ने अपने फैसले में अपने माता-पिता से मिली सीख का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें शुरू से सिखाया गया है कि भगवान से डरो, किसी और से नहीं।

उन्होंने कहा कि अगर वह किसी और से डरने लगेंगे तो जनता का भरोसा अदालत से उठ जाएगा। उन्होंने आगे लिखा कि अगर वह माफियाओं से डरने लगेंगे तो ऐसी स्थिति में इस पवित्र न्यायिक संस्था से इस्तीफा देना ही बेहतर होगा।

मुजफ्फरनगर में अपराधियों के आतंक का भी किया जिक्र

जज रवि कुमार दिवाकर ने फैसले में मुजफ्फरनगर में अपराध और माफियाओं के प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि यहां एक समय गैंगस्टर और माफियाओं का आतंक था।

उन्होंने अदालत परिसर में विक्की त्यागी की हत्या का उदाहरण देते हुए लिखा कि भरी अदालत में हत्या की घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपराधियों के मन में कानून का कितना डर था।

शौकीन गैंग और शाहनवाज को मिली फांसी का भी उल्लेख

जज ने अपने फैसले में शौकीन गैंग का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि एक समय मुजफ्फरनगर में शौकीन गैंग का आतंक हुआ करता था।

उन्होंने बताया कि हाल ही में इसी अदालत ने शौकीन के भाई शाहनवाज को भी फांसी की सजा सुनाई है।

ज्ञानवापी मामले के बाद परिवार को धमकियां मिलने का दावा

रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसले में वाराणसी के ज्ञानवापी मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी मामले के बाद उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को कई बार जान से मारने की धमकियां मिलीं।

जज के मुताबिक, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर से भी धमकियां दी गईं। उन्होंने एक आरोपी अदनान खान की ओर से इंस्टाग्राम पर दी गई कथित धमकी का भी जिक्र किया।

‘काफिर का खून तुम्हारे लिए हलाल है’ वाली धमकी का जिक्र

फैसले में जज ने लिखा कि अदनान खान नाम के एक आरोपी ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर धमकी दी थी। उनके मुताबिक, उस पोस्ट में लिखा गया था कि “काफिर का खून तुम्हारे लिए हलाल है, जो तुम्हारे दीन के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

जज ने यह भी लिखा कि उनकी फोटो लगाकर आंखों के ऊपर लाल रंग से ‘काफिर’ लिखा गया था।

‘कट्टरपंथी लोगों को मेरी हत्या के लिए उकसा रहे हैं’

जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसले में सुरक्षा को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि इस्लामिक कट्टरपंथी धर्म विशेष के लोगों को उनकी हत्या के लिए उकसा रहे हैं।

उन्होंने पुलिस सुरक्षा को लेकर भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इसके बावजूद पुलिस सुरक्षा में लापरवाही बरत रही है। उनके मुताबिक, कुछ अधिकारियों को लगता है कि वे सुरक्षा देकर कोई एहसान कर रहे हैं।

‘इस वक्त बोलना ठीक नहीं, पद की भी मर्यादा होती है’

जज ने फैसले में अपने किसी व्यवहार से दुखी होने की बात भी कही। उन्होंने लिखा कि कोई व्यक्ति पूरी दुनिया को बेवकूफ बना सकता है, लेकिन अपनी अंतरात्मा को नहीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के व्यवहार की वजह माफियाओं, गैंगस्टरों और अपराधियों को बचाना है। उन्होंने कहा कि ऐसा क्यों हुआ, यह भी वह जानते हैं, लेकिन फिलहाल इस बारे में बोलना ठीक नहीं होगा, क्योंकि पद की भी एक मर्यादा होती है।

गैंगस्टर के मैसेज का भी फैसले में जिक्र

जज दिवाकर ने फैसले में एक गैंगस्टर की ओर से कथित तौर पर भेजे गए मैसेज का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गैंगस्टर ने उन्हें मैसेज भेजकर कहा था कि अभी तो सिर्फ मुकदमों को हटवाया गया है।

जज के मुताबिक, मैसेज में यह भी कहा गया कि अगर वह उनके पीछे पड़े तो उनकी कोर्ट भी बदलवा दी जाएगी और जिले से बाहर ट्रांसफर करवा दिया जाएगा, क्योंकि उनकी पहुंच ऊपर तक है।

‘जज दबाव में न्याय करने लगे तो लोकतंत्र के लिए गंभीर संकट’

रवि कुमार दिवाकर ने फैसले में लिखा कि किसी लोकतांत्रिक देश के लिए यह बेहद गंभीर संकट की स्थिति है, जब कोई जज दबाव या प्रभाव में आकर न्याय करने में असमर्थ हो जाए।

उनकी इन टिप्पणियों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, जजों पर कथित दबाव और अपराधियों के प्रभाव को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दिया है।

17 साल की सेवा में 36 दोषियों को फांसी की सजा

जज रवि कुमार दिवाकर ने वर्ष 2009 में न्यायिक सेवा शुरू की थी। उनकी 17 साल की सेवा में अब तक 36 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।

मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान उन्होंने करीब 5 महीने में 23 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

पिछले महीने करीब 100 मुकदमे दूसरी अदालतों में ट्रांसफर हुए

फैसले में जज दिवाकर ने यह भी लिखा कि पिछले महीने जिला जज ने उनकी अदालत से करीब 100 मुकदमों को रिकॉल कर दूसरी अदालतों में ट्रांसफर कर दिया था।

इसी संदर्भ में उन्होंने फैसले में मुकदमों को हटाए जाने और कथित गैंगस्टर के मैसेज का उल्लेख किया।

अब जानिए शहजादी हत्याकांड में क्या हुआ था

जिस मामले में नदीम को फांसी की सजा सुनाई गई है, वह 23 जुलाई 2018 की रात का है। आरोप है कि रात करीब 8:30 बजे नदीम ने अपनी पत्नी शहजादी के साथ मारपीट और गाली-गलौज की।

इसके बाद उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी गई। गंभीर रूप से झुलसी शहजादी को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान 28 जुलाई 2018 को सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली में उसकी मौत हो गई।

परिवार के लोग बयान से मुकर गए, लेकिन आखिरी बयान बना निर्णायक सबूत

मामले की सुनवाई के दौरान शहजादी के माता-पिता और भाई अपने बयान से मुकर गए। इसके बावजूद 24 जुलाई 2018 को सफदरजंग अस्पताल में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने शहजादी ने जो आखिरी बयान दिया था, वह मामले में निर्णायक साबित हुआ।

अपने बयान में शहजादी ने कहा था कि उसके पति नदीम ने ही उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाई थी।

नदीम को फांसी, दहेज हत्या के आरोप से बरी

अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार, 7 सितंबर को नदीम को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

हालांकि, शहजादी ने अपने बयान में दहेज की मांग या प्रताड़ना का कोई जिक्र नहीं किया था। इसी वजह से नदीम को दहेज हत्या के आरोपों से बरी कर दिया गया।

आरोपी ननद सोनी भी सभी आरोपों से बरी

मामले में आरोपी ननद सोनी को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। वहीं, आरोपी सास शमशीदा की पहले ही मौत हो चुकी है।

29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर में संभाला था कार्यभार

न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में कार्यभार संभाला था।

मुजफ्फरनगर से पहले वह संभल और बरेली में भी तैनात रह चुके हैं। वर्ष 2009 से न्यायिक सेवा में रहते हुए उन्होंने कई चर्चित मामलों में फैसले सुनाए हैं।

जज की टिप्पणियों ने फैसले को बनाया चर्चा का विषय

शाहपुर शहजादी हत्याकांड में नदीम को मिली फांसी की सजा के साथ-साथ जज रवि कुमार दिवाकर की फैसले में लिखी टिप्पणियां भी अब चर्चा का बड़ा विषय बन गई हैं। खास तौर पर “डरपोक जज कहलवाना नहीं”, माफियाओं के दबाव, कथित धमकियों, मुकदमों के ट्रांसफर और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों ने इस फैसले को सामान्य आपराधिक मामले से कहीं ज्यादा चर्चा में ला दिया है।