Middle East War: कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। आज यानी 9 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम में 2.25% की तेजी देखने को मिली। इसके पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य झड़पों को बड़ी वजह बताया जा रहा है। अगर क्रूड ऑयल की कीमतों में इसी तरह तेजी जारी रहती है तो भारत में पेट्रोल-डीजल के साथ LPG की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
9 सितंबर को 100 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड
क्रूड ऑयल की कीमतों में इस ताजा तेजी से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव करीब 98 डॉलर प्रति बैरल था। अब इसमें 2.25% की बढ़ोतरी के बाद कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
इससे पहले 24 जुलाई को भी क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची थी। लगातार बढ़ती कीमतों ने भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका-ईरान तनाव से तेल बाजार में उथल-पुथल
तेल की कीमतों में ताजा उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा नया सैन्य तनाव बताया जा रहा है। यूएस सेंट्रल कमांड ने मंगलवार देर रात एक बयान जारी कर दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के 5 क्रूड ऑयल टैंकरों को नष्ट कर दिया।
अमेरिका के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल से किए गए हमले के जवाब में की गई।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होना बना बड़ी चिंता
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना भी बताया जा रहा है। करीब 167 किलोमीटर लंबा यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग के कारण यह समुद्री रूट सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। खतरे को देखते हुए तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है और कोई भी टैंकर इस रास्ते से गुजरने से बच रहा है।
दुनिया के 20% पेट्रोलियम की आवाजाही इसी रास्ते से
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का करीब 20% हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है।
सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश भी अपने निर्यात के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं। ईरान भी इसी रूट के जरिए तेल का निर्यात करता है।
भारत की तेल और LNG सप्लाई पर भी असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है।
ऐसे में अगर इस रूट पर लंबे समय तक तनाव बना रहता है और तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होती है तो भारत के लिए कच्चे तेल और LNG की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा असर आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
एक महीने में 22% महंगा हुआ कच्चा तेल
क्रूड ऑयल की कीमतों में पिछले एक महीने में करीब 22% की तेजी देखने को मिली है। 10 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
इसके बाद लगातार तेजी के साथ अब इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इतनी तेजी भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है।
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का खतरा
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की कीमतों और अन्य लागतों को ध्यान में रखकर ईंधन की कीमतें तय करती हैं।
इसके अलावा महंगे कच्चे तेल का असर परिवहन लागत से लेकर रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है।
मई में सरकारी तेल कंपनियों ने बढ़ाए थे दाम
इससे पहले मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पेट्रोल पंपों पर इन तीनों सरकारी तेल कंपनियों का नियंत्रण है।
इन शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 |
| भोपाल | 114.65 | 99.74 |
| रायपुर | 107.96 | 101.17 |
| जयपुर | 112.66 | 97.78 |
| पटना | 112.70 | 99.87 |
| चंडीगढ़ | 101.53 | 89.63 |
| लखनऊ | 102.05 | 99.28 |
| देहरादून | 100.20 | 97.10 |
LPG की कीमतों पर भी पड़ सकता है असर
क्रूड ऑयल के दाम अगर लगातार बढ़ते रहे तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रह सकता। LPG की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी घरेलू ऊर्जा कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कितने समय तक बना रहता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों की आवाजाही कब सामान्य होती है। अगर तनाव जल्द कम नहीं हुआ और क्रूड की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी रहीं तो भारत में पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
यानी आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति पर भारत में ईंधन की कीमतों और महंगाई का असर काफी हद तक निर्भर करेगा।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).