Gyanesh Kumar SIR Row: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश की राजनीति और चुनावी व्यवस्था से जुड़ा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर कई राज्यों में प्रदर्शन किया। देहरादून में कार्यकर्ता बैरिकेडिंग तक पहुंच गए, जबकि पटना में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने भी ज्ञानेश कुमार को दी गई 48 घंटे की डेडलाइन दोहराते हुए कहा है कि इस्तीफा नहीं देने पर 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। अब इस पूरे विवाद ने सुप्रीम कोर्ट का भी रुख कर लिया है, जहां दाखिल एक PIL में SIR से जुड़े फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को चुनौती दी गई है और करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटने के मामले की SIT जांच की मांग की गई है।
क्यों बढ़ा ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विवाद?
विवाद की मुख्य वजह Election Commission की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया है। SIR का मकसद मतदाता सूची की समीक्षा और उसे अपडेट करना है, लेकिन इसके दौरान मतदाता नामों को लेकर विपक्ष और कुछ चुनावी अधिकारियों की ओर से गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में जून 2025 से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ड्राफ्ट वोटर रोल में 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए। इसी रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में क्या मुद्दे थे?
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और दोबारा जोड़ने, SIR प्रक्रिया में अपील, मतदाता डेटाबेस की निगरानी और चुनावी डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपनी जानकारी या सहमति के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए और चुनावी डेटाबेस की पहुंच को केंद्रीकृत किए जाने को लेकर भी चिंता जताई। कुछ आपत्तियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं।
Form-6 और चुनावी सॉफ्टवेयर पर क्या विवाद है?
इस पूरे विवाद में Form-6 भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। Form-6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए किया जाता है। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में Form-6 में ऐसा सवाल जोड़ा गया, जिसमें नए मतदाता या उनके माता-पिता/दादा-दादी का पिछली SIR की मतदाता सूची में मौजूद होना पूछा गया। इस बदलाव को लेकर भी सवाल उठे।
नई सुप्रीम कोर्ट याचिका में इसी तरह के बदलावों को लेकर और गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका में आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार के तहत ऐसे फैसले, दिशानिर्देश और सॉफ्टवेयर बदलाव किए गए, जिन पर आयोग के सभी सदस्यों की सहमति नहीं थी।
हालांकि, ये याचिका में लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल PIL में क्या-क्या मांग की गई?
25 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि SIR से संबंधित वे फैसले, दिशानिर्देश और सॉफ्टवेयर बदलाव असंवैधानिक और कानूनी अधिकार से बाहर घोषित किए जाएं, जिन्हें कथित तौर पर आयोग के बहुमत की सहमति के बिना लागू किया गया।
13 करोड़ वोटर्स के नाम हटने की SIT जांच की मांग
याचिका में SIR के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। इसके लिए न्यायिक जांच आयोग या Special Investigation Team यानी SIT गठित करने की मांग रखी गई है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित मूल Form-6 को बहाल किया जाए और पात्र वयस्कों को मूल वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकरण की अनुमति दी जाए।
किन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग?
याचिका में सिर्फ CEC ज्ञानेश कुमार का नाम नहीं है। इसमें वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग और ECI की IT महानिदेशक सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने Representation of the People Act, 1950 की धारा 32 के तहत कथित तौर पर जानबूझकर आधिकारिक कर्तव्य का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर अभियोजन शुरू करने का निर्देश देने की मांग की है।
चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?
दूसरी तरफ Election Commission ने आंतरिक मतभेद या असहमति की खबरों को अलग तरीके से पेश किया है। आयोग का कहना है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और तकनीकी टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।
ECI ने कहा कि व्यक्तिगत राय को आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता और उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं और उसके कदम कानून के अनुरूप हैं।
यानी एक तरफ रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कई औपचारिक आपत्तियों की बात सामने आई है, जबकि आयोग का आधिकारिक पक्ष यह है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और अलग-अलग विचार निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यही इस पूरे विवाद का एक अहम बिंदु है।
कांग्रेस ने देशभर में क्यों किया प्रदर्शन?
शुक्रवार को कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया। पार्टी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रही है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।
दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर जुटे और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। कई अन्य राज्यों में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने चुनाव कार्यालयों की ओर मार्च करने की कोशिश की।
देहरादून में बैरिकेडिंग पर चढ़े कार्यकर्ता
उत्तराखंड के देहरादून में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय कूच किया। पुलिस ने सचिवालय से पहले बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई।
प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण मेहरा और कई विधायक व वरिष्ठ नेता शामिल रहे। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
पटना में वाटर कैनन का इस्तेमाल
पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। करीब आधा किलोमीटर के इस मार्च में कार्यकर्ताओं ने CEC के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए और कुछ जगह पुलिस ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
CJP ने भी दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
इस विवाद में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने गुरुवार को ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था।
CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके और सह-संयोजकों सौरव दास व आशुतोष रांका ने कहा कि अगर CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा और दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू करने की बात कही गई। CJP ने इसी दौरान “Election Commission Thik Karo” अभियान शुरू करने की घोषणा की।
2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
CJP ने अब कहा है कि अगर तय समयसीमा में ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, संगठन की योजना मुंबई से अभियान शुरू करने और फिर इसे देश के दूसरे शहरों तक ले जाने की है।
मामला अब राजनीतिक प्रदर्शन से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
पूरे घटनाक्रम को देखें तो विवाद के तीन बड़े मोर्चे बन गए हैं। पहला, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का राजनीतिक विरोध और CEC के इस्तीफे की मांग। दूसरा, चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्तों की कथित औपचारिक आपत्तियों को लेकर उठा सवाल। तीसरा, SIR के फैसलों, Form-6 और सॉफ्टवेयर बदलावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई PIL।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और याचिका में लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। वहीं Election Commission अपने स्तर पर इन आरोपों और आंतरिक असहमति की रिपोर्टों को खारिज करते हुए कह चुका है कि अलग-अलग राय संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
इसलिए आने वाले दिनों में सबसे अहम बात यह होगी कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है, SIR से जुड़े रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं पर क्या न्यायिक जांच होती है और चुनाव आयोग दो चुनाव आयुक्तों की ओर से सामने आई आपत्तियों पर क्या विस्तृत स्पष्टीकरण देता है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).