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तात्या टोपे के नाम से जाना जाएगा विश्वविद्यालय सीनेट हॉल – हाईटेक होगी शिक्षा

रिपोर्ट – ज्ञानेंद्र शुक्ला – कानपुर नगर
 
Kanpur News – भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए संस्कृति और प्रगति ही नहीं बल्कि प्रकृति के अनुरूप भी कार्य करना होगा। हमें अपने विचारों, बौद्धिकता और कार्य व्यवहार तीनों से प्रेरित होकर कार्य करना चाहिए तथा शिक्षा नीति पर क्रमबद्ध रूप से योजना बनाने की आवश्यकता है। जिससे हर व्यक्ति तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति की पहुंच सुनिश्चित करायी जा सके। 
 
जानिए क्या बोले अतुल कोठारी 
 
यह कहना है शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के महासचिव अतुल कोठारी का। जो छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर व शिक्षा संस्कृति उद्यान न्यास नई दिल्ली के संयुक्त तत्वधान में आयोजित ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन: चुनौतियां व समाधान’ विषय पर हुई इस एक दिवसीय संगोष्ठी में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य, एनईपी सारथी, सभी निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक भी उपस्थित रहे। अपने वक्तव्य में अतुल कोठारी ने कहा कि समाधान वहीं होता है जहां समस्या होती है,नई शिक्षा नीति क्रियान्वयन वास्तविकता में एक बहुत बड़ी चुनौती है। जिसे हम सभी को समझना होगा। पहले के समय में युवा नौकरी करने वाली पढ़ाई करते थे। इससे उन्हें नौकर बनने की लत लग गई और आज भी वह इस लंबी कतार में खड़े रहते हैं, लेकिन अब जब से राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हुई है तब से छात्र-छात्राओं को स्वावलंबी बनाने वाली पढ़ाई कराई जा रही है। इसे पढ़कर आने वाले समय में युवा स्वावलंबी बनकर दूसरों को रोजगार देने में सक्षम होंगे। अतुल कोठारी ने कहा कि लोग जब बीए बीएससी की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं। उसके बाद शोध का कार्य शुरू करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। अब लोगों को प्रथम वर्ष से ही शोध का कार्य कराया जाने लगा है। शोध में थ्योरी के साथ-साथ प्रेक्टिकल पर भी जोर दिया जाना चाहिए, ताकि जो शोधार्थी हैं वह जमीनी स्तर पर कार्यों का अनुभव ले सके। देश के विकास में शोध का बड़ा योगदान है।
 
आज आया समझ में 
अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा तो हम ग्रहण करते हैं लेकिन अपनी भारतीय परंपरा को भी इस शिक्षा में लाना चाहिए। अगर हम अपनी सांस्कृतिक परंपरा से दूर होंगे तो ऐसी शिक्षा किस काम की। इसलिए सभी पाठ्यक्रम में भारतीय भाषाओं का प्रयोग होना चाहिए। 2012 से मैं इस मांग को कर रहा हूं। उस समय लोग मेरा मजाक उड़ाते थे, लेकिन आज इसको लोग जरूरी समझ रहे हैं। इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम आज 12 भाषाओं में आ गया है। मध्य प्रदेश में मेडिकल की किताबें हिंदी में आ गई है। उन्होने शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप यह समझिए कि शिक्षा के क्षेत्र में आपका क्या रोल है इसे सोचिए और एक नोटपैड पर लिखें और फिर उस पर कैसे काम कर सकते हैं, यह योजना बनाइए। देखिए कितना बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बच्चों को केवल शिक्षा तक ही सीमित न रखें। 
 
एनईपी लागू करने वाला है अपना विश्वविद्यालय 
 
कार्यक्रम में कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि विश्वविद्यालय के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रदेश में सबसे पहले एनईपी लागू करने वाला वह विश्वविद्यालय है। हम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को भी साथ लेकर चल रहे हैं। आज विश्वविद्यालय की प्रगति को देखते हुए इसे एक मॉडल विश्वविद्यालय के तौर पर देखा जा रहा है। प्रो पाठक ने अतुल कोठारी के दिए गए सुझावों को मंच से ही लागू कराने के लिए प्रति कुलपति प्रो सुधीर कुमार अवस्थी एवं निदेशक महाविद्यालय विकास परिषद प्रो राजेश कुमार द्विवेदी को निर्देशित भी किया। इससे पहले विषय परिचय में प्रति कुलपति प्रो सुधीर कुमार अवस्थी ने विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत किए गए कार्यो की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अतुल कोठारी को फाइन आर्ट्स विभाग द्वारा निर्मित चित्र तथा जूट बैग भी भेंट किया गया। इस अवसर पर अतिथियों का स्वागत प्रो राजेश कुमार द्विवेदी ने किया। संचालन डॉ रतन रितु मिश्रा एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ अनिल कुमार यादव ने ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो रोली शर्मा, डॉ शशिकांत त्रिपाठी, संजय स्वामी, डॉ पुणेंदु मिश्रा, प्रो यतींद्र कुशवाहा समेत विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य मौजूद रहे। 
 
तात्या टोपे के नाम से जाना जाएगा सीनेट हॉल
 
विश्वविद्यालय का सीनेट हॉल अब महान स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे के नाम से जाना जाएगा। कार्यक्रम में अतुल कोठारी के सुझाव पर कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने नामकरण की घोषणा की। ज्ञात हो सीनेट हॉल का हाल ही में जीर्णोद्धार किया गया है।