महारात्री में सिद्ध होती हैं काली शक्तियां
दीपावली की रात धरती में विचरण करती हैं दैवीय और दानवीय शक्तियां
दीपावली की रात कहलाती है महारात्रि
सनातन धर्म में दीपावली का त्योहार सबसे बड़ा त्योहार मना जाता है क्योंकि इसकी अनसुलझी विशेषताएं भी हैं। दीपावली की रात को महारात्रि भी कहते हैं शास्त्रों के अनुसार इस रात दैवीय और दानवी शक्तियां धरती में विचरण करने निकलती हैं। जहां साधू दैवीय शक्तियों की पूजा करते हैं वहीं अघोरी और तांत्रिक दनवीय शक्तियों को जाग्रत करते है। एसी ही रोंगटे खड़े करने वाली एक अघोरी की साधना करते हुए कुछ तस्वीरें हमारे कैमरे में कैद हुई हैं। जो इंसानी खोपड़ियां रख तंत्र साधना कर रहा था।
तंत्र साधना की यह तस्वीरें उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आई हैं जहां एक अघोरी दीपावली की रात तंत्र साधना करते नजर आया यह तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं अघोरी ने साधना के दौरान पूजन स्थल में इंसानियां खोपड़ी सजा रखीं थीं वहीं उसने प्रसाद भी इंसानी खोपडी में रखा था और जो वह मंत्र पढ़ रहा था वह रौंगटे खड़े करने वाले थे। यह सब हमने अपनी जिम्मेदारी में कैमरे में कैद किया आपको बता दे की ऐसी साधना के दौरान कोई भी आस पास नही भटक सकता क्योंकि निगेटिव शक्तियों का बुरा असर पड़ता है और ऐसे में आपके साथ कोई भी घटना हो सकती है। अब समझिए इसका महत्व क्या है दीपावली की रात को ऐसा क्या होता है की तांत्रिक और अघोरी इसी रात इसी सिद्धियां करते हैं।
दीपावली उपनाम दिवाली और अमावस्या अर्थात काली रात हिंदू पंचांग के अनुसार मां के 30 दिन को चंद्रकला के आधार पर 15 – 15 दिन में दो पक्षों में बांटा गया शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते हैं और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या कहते हैं।
कर्मकांडी पंडित नवीन कुमार मिश्रा ने बताया की वेद के अनुसार आज ही के दिन शंकर भगवान ने देवी पार्वती को तंत्र साधना की विद्या दी थी इसी सिद्धि के बाद वह काली और चंडी कहलाई। मान्यता है कि शुक्ल पक्ष में देव आत्माएं अर्थात वैष्णवी शक्तियां सक्रिय होती है और कृष्ण पक्ष में तामसी आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती है।
वैसे यह भी मान्यता है कि दिवाली पर्व के दौरान दिन में आत्माएं ज्यादा सक्रिय रहती है और इस कारण मनुष्य में भी राक्षसी प्रवृत्ति का असर बढ़ जाता है इसलिए सनातन परंपरा से ही उक्त दिनों में व्यक्ति के मन मस्तिष्क को इस त्योहार के माध्यम से धर्म की ओर मोड़ दिया जाता है वहीं यह भी माना जाता है कि अमावस्या के दिन भूत प्रेत पितृ पिशाच निशाचर जीव जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय उन्मुक्त रहते हैं। तंत्र साधना से जुड़े हुए व्यक्ति को या साधक को इन दिनों विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
वैज्ञानिकों के अनुसार दिवाली के दिनों में प्रेत के शरीर की रचना में 25 प्रतिशत फिजिकल एटम और 75 प्रतिशत इथरिक एटम होता है। इसी प्रकार पितृ शरीर के निर्माण में 25 प्रतिशत इथ्रिक एटम और 75 प्रतिशत एस्टल एटम होता है। इथ्रिक एटम सघन हो जाए तो प्रेतों का छायाचित्र भी लिया जा सकता है और इसी प्रकार यदि एस्ट्रल एटम सघन हो जाए तो पितरों का भी छायाचित्र लिया जा सकता है।
वही ज्योति सिद्धांत के अनुसार ज्योतिष में चंद्र को मन का देवता माना गया है। दिवाली एवं अमावस्या के दिन चंद्रमा कभी दिखाई नहीं देता है। ऐसे में मनुष्य के शरीर में हलचल अधिक बढ़ जाती है और इस दौरान जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है उसे नेगेटिव एनर्जी नकारात्मक शक्ति अपने प्रभाव में ले लेती है और वह इस दौरान कई बार सुसाइड करने की भी कोशिश करने लग जाता है।
विशेषकर दीपावली की रात को तांत्रिक लोग तामसी शक्तियों का विशेष रूप से आह्वान करते हैं ताकि अपनी पूजा करके अपनी शक्तियों को बढ़ा सकें और अपने शरीर में बहुत मात्रा में शक्तियों को धारण कर सके। तंत्र दिवस के रूप में तांत्रिक साधक लोग दिवाली के दिन को अपना विशेष उत्साह पर्व भी मानते हैं।
तांत्रिकों के लिए दसमहाविद्या या महा शक्तियां प्रमुख बताई गई है-
महाकाली आर्दपाटेश्वरी, मां तारा, मां षोडशी, मां भुनेश्वरी, मां छिन्नमस्तिका, मां त्रिपुर, भैरवी मां, धूमावती माता, श्री बगलामुखी, मां मातंगी, मां कमला। सनातन परंपरा के अनुसार मान्यता है कि दीपावली के पर्व पर साधक आधार तांत्रिक गुरु के द्वारा या साधक के द्वारा इन विद्याओं की साधना करने पर आत्मज्ञान बढ़ जाता है।
साधना कई प्रकार की होती है जो इसी रात की जाती है।
यक्षिणी साधना, महा यक्षिणी साधना, धनदा यक्षिणी साधना, पुत्रदा यक्षिणी साधना, महालक्ष्मी साधना, शव साधना, अघोर साधना जैसी कई साधना है शास्त्रों एवं मान्यता के अनुसार रावण के द्वारा रचित उड़ीस तंत्र बुक में बताई गई है।
श्मशान साधना तांत्रिकों का विशेष स्थान होता है वैसे तो तांत्रिक लोग अधिकतर समय श्मशानों एवं नदी के तटों पर सुनसान जगह ही व्यतीत करते हुए साधना करते हैं।
तांत्रिकों के अनुसार श्मशान साधना थोड़ी कठोर साधना होती है उससे खुद के शरीर को भी नुकसान पहुंचने का डर रहता है
सामान्य जन के लिए विकल्प यही है कि आप एकांत जगह जाकर गांव या शहर के बाहर किसी सुनसान जगह जाकर आप साधना कर सकते हैं।
सामान्य जन के लिए दीपावली के तांत्रिक अनुष्ठान-भैरव दीपदान बगलामुखी अनुष्ठान नवचंडी एवं शतचंडी अनुष्ठान हनुमत शत्रुंजय अनुष्ठान सहित कई अनुष्ठान शास्त्रों में सामान्य जन के लिए भी बताए गए हैं।
मान्यता के अनुसार अगर गृहस्थ व्यक्ति साधक बंध कर दीपावली की रात्रि को हनुमत बजरंग बाण के लगातार 1108 करता है तो उसको बहुत बड़ी पॉजिटिव एनर्जी सकारात्मक शक्ति प्राप्त कर सकता है।