जिज्ञासु महाराज ने बताया कि प्रभु राम जानते थे कि खर-दूषण को बल से नहीं मारा जा सकता। उनका अंत तभी होगा जब वे एक-दूसरे का वध करें। इसके लिए जरूरी था कि वे एक-दूसरे में अपने शत्रु को देखें, इसीलिए प्रभु ने एक बाण से ऐसी माया रची कि खर-दूषण ने एक दूसरे में राम को देखा और आपस में ही लड़ मरे। अंत समय में राम को देखने और राम का नाम लेने से उनका उद्धार भी हो गया।
नेताओं को दी नसीहत
आज की कथा के दौरान किदवई नगर क्षेत्र से भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी, भगवान परशुराम महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भाजपा श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक भूपेश अवस्थी, कानपुर व्यापार मंडल के वरिष्ठ मंत्री विजय शुक्ला, व्यायाम शिक्षक विकास तिवारी, कार्यक्रम संयोजक देवेश द्विवेदी, मोनू पांडे, राजेन्द्र सिंह चौहान, रविशंकर अग्निहोत्री, हितेश तिवारी, अभिनव शुक्ला, गोलू पार्षद, अजय अग्निहोत्री, विवेक वाजपेयी, राम कुमार द्विवेदी, अशोक मिश्रा आदि मौजूद रहे।

गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है