उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में माफिया मुख्तार अंसारी की मौत को लेकर जेल प्रशासन पर कई आरोप लगाए गए थे जिसकी जांच प्रक्रिया अब तेज हो गई है और इसी को लेकर अपर जिला अधिकारी ने एक सूचना पत्र जारी किया है जिसमें 15 अप्रैल तक आरोप दाखिल करने का समय दिया गया है वहीं दोपहर करीब 3 बजे सिविल जज सीनियर डिवीजन गरिमा सिंह के साथ अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार मामले की जांच करने मंडल कारागार बांदा पहुंचे हैं।

आपको बताते चलें कि 28 मार्च को बांदा मंडल कारागार में बंद मुख्तार अंसारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई जिसे देर शाम करीब आठ 25 पर रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया जहां 9 डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन रात करीब 10:00 बजे हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई जिसको लेकर परिजनों ने जेल प्रशासन पर हत्या करने का आरोप लगाया था और न्यायालय से शिकायत की थी इसके बाद न्यायालय ने सिविल जज गरिमा सिंह को जांच अधिकारी बनाते हुए पूरे मामले की जांच के आदेश किए थे इसी क्रम में अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार ने एक सूचना पत्र जारी किया जिसमें उन्होंने लिखा की मुख्तार अंसारी मौत मामले की जांच उनके पास है और जो कोई भी साक्ष्य लिखित या मौखिक रूप से प्रस्तुत करना चाहता हो वह 15 अप्रैल 2024 तक आकर उनके कार्यकाल के दौरान मिल सकता है और प्रस्तुत कर सकता इसके कुछ घंटे बाद अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार और सिविल जज सीनियर डिवीजन गरिमा सिंह मंडल कारागार बांदा पहुंचे और जांच शुरू कर दी है इस जांच में मंडल कारागार के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है