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Religion or Barbarity? अंधविश्वास में ऐसी निर्मम हत्या—न देखी होगी, न सुनी होगी!

Religion or Barbarity?आस्था के नाम पर अंधविश्वास का खूनी खेल: मासूम सुअर के बच्चे की गला रेतकर हत्या, गांव की भीड़ बनी तमाशबीन!

रायबरेली ज़िले के गुरबक्शगंज थाना क्षेत्र के पिपरी गांव में आस्था और परंपरा के नाम पर जो शर्मनाक दृश्य सामने आया, उसे देखकर हर इंसान का ज़मीर हिल जाएगा। यहां कुल देवता की वार्षिक पूजा के दौरान सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में एक मासूम सुअर के बच्चे की नृशंस हत्या कर दी गई।

Religion or Barbarity? अंधविश्वास का खौफनाक चेहरा

हवन-पूजन के बाद अचानक माहौल बदल गया। गांव के कुछ तथाकथित धर्मगुरुओं और बड़े बुजुर्गों ने सुअर के बच्चे की बलि देने का ऐलान किया। पिपरी गांव का मैदान चीखों और ढोंग का गवाह बना। जैसे ही मासूम सुअर के बच्चे की गर्दन काटी गई, उसकी दर्दनाक चीखें गूंज उठीं, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि सैकड़ों लोग वहां खड़े तमाशा देखते रहे, किसी ने भी इस निर्दयी हत्या को रोकने की कोशिश नहीं की।

Religion or Barbarity?औरत बनी “देवी”, फिर उसी के सामने हुई हत्या

घटना का सबसे भयावह पहलू यह था कि एक महिला को देवी का रूप मानकर “महारानी” की उपाधि दी गई और फिर उसी “देवी” के सामने मासूम प्राणी की जान ले ली गई। सवाल यह है कि एक औरत, जो अपने बच्चे को ज़रा सी चोट लगने पर बेचैन हो जाती है, वही कैसे अपने सामने एक जीवित प्राणी की गर्दन कटते हुए देख सकती है?

Religion or Barbarity?पुजारी का पल्ला झाड़ना

जब मंदिर के पुजारी अंशु पंडित से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा—
“हमें तो केवल पूजा के लिए बुलाया गया था। बलि की जानकारी हमें नहीं थी और न ही हम ऐसे अंधविश्वास पर विश्वास करते हैं।”
लेकिन सवाल यह उठता है कि जब यह खून-खराबा सबके सामने हुआ, तो आखिर वहां मौजूद कथित “धर्म रक्षक” चुप क्यों रहे?

इंसानियत शर्मसार, आस्था का कत्ल

यह घटना केवल एक सुअर के बच्चे की हत्या नहीं है, बल्कि यह इंसानियत की आत्मा पर गहरा घाव है। आस्था के नाम पर अंधविश्वास की इतनी बड़ी मिसाल और कहीं देखने को नहीं मिलेगी। धर्म और परंपरा के आड़ में एक निर्दोष प्राणी की हत्या कर दी गई और पूरा गांव इसे “देवता का आदेश” मानकर मौन खड़ा रहा।

Religion or Barbarity? पुलिस जांच में जुटी

इस वीडियो के वायरल होते ही मामला गंभीर हो गया। बुद्धिजीवी विजय प्रताप सिंह ने थाने में तहरीर दी और इसे सनातन धर्म के ख़िलाफ़ बताया। वहीं रायबरेली पुलिस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि प्रभारी निरीक्षक गुरबक्शगंज को मामले की जांच और आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

यह घटना केवल रायबरेली ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक शर्मनाक सवाल खड़ा करती है—
क्या आस्था के नाम पर हम इतने अंधे हो गए हैं कि मासूम जानवर की चीखें भी हमें नहीं सुनाई देतीं? क्या धर्म का नाम लेकर क्रूरता को जायज़ ठहराया जा सकता है? 

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