ASP Anuj Chaudhary: मुजफ्फरनगर की एक अदालत ने 16 साल पुराने चर्चित प्रधानी चुनाव हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले में पूर्व प्रधान प्रमोद चौधरी और सहदेव उर्फ पप्पू को दोषी करार देते हुए अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का मामला माना। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। खास बात यह है कि दोषी प्रमोद चौधरी, उत्तर प्रदेश पुलिस के एडीशनल एसपी अनुज चौधरी का ममेरा भाई बताया जा रहा है। कोर्ट ने सबूत गायब होने के मामले में भी सख्त रुख अपनाते हुए एसएसपी को जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए कड़ा संदेश, कोर्ट ने सुनाई फांसी
मुजफ्फरनगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ग्राम पंचायत लोकतंत्र की पहली सीढ़ी होती है। यहां लोगों के वोट और बैलेट पेपर की इज्जत सबसे ऊपर होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि चुनावी रंजिश में हत्या करना लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर सीधा हमला है। इसी वजह से इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 24 अगस्त 2010 का है। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव निवासी राजवीर सिंह (60) ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। आरोप है कि उस समय के प्रधान प्रमोद चौधरी को यह बात पसंद नहीं थी और वह राजवीर से रंजिश रखने लगा था।
घटना वाले दिन सुबह करीब 7:15 बजे राजवीर सिंह अपने खेत की ओर जा रहे थे। तभी गांव के जंगल में पहले से घात लगाए बैठे प्रमोद चौधरी, सहदेव उर्फ पप्पू और उनके दो शूटर अमित व विपिन शर्मा ने उन्हें घेर लिया।
‘तुझे गांव का अगला प्रधान बना देते हैं’ कहकर बरसाईं गोलियां
अभियोजन के अनुसार, आरोपियों ने पहले राजवीर सिंह के साथ गाली-गलौज की और फिर कहा, “बहुत बड़ा आदमी बनता है, आ तुझे गांव का अगला प्रधान बना देते हैं।”
इसके बाद चारों आरोपियों ने पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलियां लगने से राजवीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
दो ग्रामीण बने घटना के चश्मदीद गवाह
वारदात के दौरान खेतों की ओर जा रहे सुकेन्द्र और सत्यवीर ने पूरी घटना अपनी आंखों से देखी। जब उन्होंने शोर मचाया तो हमलावरों ने उन पर भी फायरिंग कर दी। जान बचाने के लिए दोनों ग्रामीण पूरे दिन गन्ने के खेत में छिपे रहे और शाम होने के बाद बाहर निकले।
शुरुआत में मृतक के बेटे प्रदीप ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन बाद में दोनों चश्मदीदों की गवाही के आधार पर आरोपियों की पहचान हो गई।
दो शूटर 2011 में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वारदात में शामिल अमित और विपिन शर्मा हिस्ट्रीशीटर अपराधी थे। 17-18 जनवरी 2011 की रात शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के दौरान दोनों मारे गए। उनकी मौत के बाद उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
पुलिस ने जांच में यह भी बताया कि आरोपी प्रमोद चौधरी ने गवाह संजीव कुमार के सामने पुरानी रंजिश के चलते हत्या करने की बात स्वीकार की थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली हत्या की पूरी कहानी
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर संजय भटनागर ने अदालत को बताया कि राजवीर सिंह के शरीर पर 7 गोली लगने के निशान मिले थे। इनमें 5 एंट्री और 2 एग्जिट वुंड थे। चेहरे, गर्दन और सीने पर बेहद करीब से गोली मारने के सबूत मिले।
कोर्ट ने माना कि मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही पूरी तरह एक-दूसरे की पुष्टि करती हैं। इसी आधार पर प्रमोद चौधरी और सहदेव उर्फ पप्पू को दोषी ठहराया गया।
पुलिस मालखाने से गायब हो गए अहम सबूत
सुनवाई के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ। घटना स्थल से बरामद 32 बोर के चार खोखा कारतूस तितावी थाने के मालखाने से गायब मिले। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने पुलिस की मिलीभगत से अहम सबूत गायब कराए।
मामले के विवेचक ने भी अदालत में स्वीकार किया कि मालखाने से कारतूस गायब हैं।
एसएसपी को एफआईआर दर्ज करने के आदेश
अदालत ने इस लापरवाही को बेहद गंभीर माना। कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के एसएसपी को निर्देश दिया कि मालखाने से सबूत गायब होने के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही विभागीय और कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
16 साल बाद परिवार को मिला इंसाफ
राजवीर सिंह के परिजनों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। परिवार का कहना है कि 16 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उन्हें न्याय मिला है। गांव के लोगों ने भी अदालत के फैसले को न्यायसंगत बताते हुए कहा कि इससे चुनावी हिंसा करने वालों को कड़ा संदेश जाएगा।
एडीशनल एसपी अनुज चौधरी से पारिवारिक संबंध के चलते मामला चर्चा में
इस फैसले के बाद यह मामला एक और वजह से सुर्खियों में आ गया है। फांसी की सजा पाने वाले पूर्व प्रधान प्रमोद चौधरी, उत्तर प्रदेश पुलिस के चर्चित अधिकारी और वर्तमान में एडीशनल एसपी अनुज चौधरी के ममेरे भाई हैं। अनुज चौधरी यूपी पुलिस का जाना-पहचाना चेहरा हैं और कई चर्चित मामलों में उनकी कार्रवाई सुर्खियों में रही है। सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी पहचान है। ऐसे में पारिवारिक रिश्ते की वजह से इस फैसले की चर्चा और तेज हो गई है।
नोट: इस मामले में अदालत का फैसला केवल दोषी ठहराए गए आरोपियों के खिलाफ है। एडीशनल एसपी अनुज चौधरी का इस हत्याकांड में किसी भी तरह का नाम या आरोप नहीं है। उनका उल्लेख केवल आरोपी से पारिवारिक संबंध के संदर्भ में है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).