BJP विधायक विवेक वर्मा से ठगी की कोशिश या राजनीतिक हैसियत पर बड़ा सवाल? साढ़े तीन लाख में राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात का दावा, कई सवालों के घेरे में पूरा मामला
फोन की एक कॉल और खड़े हो गए कई सवाल
पीलीभीत। भाजपा विधायक विवेक वर्मा से कथित तौर पर ठगी की कोशिश का मामला अब केवल साइबर अपराध तक सीमित नहीं रह गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कराने के नाम पर ₹3.50 लाख की मांग किए जाने की घटना ने विधायक की राजनीतिक पहुंच, पार्टी में उनके वर्चस्व और संगठन से जुड़े कई सवालों को जन्म दे दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विधायक विवेक वर्मा के पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को “नीरज” बताया और दावा किया कि वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से उनकी मुलाकात करा सकता है। इसके बदले उसने साढ़े तीन लाख रुपये खर्च करने की बात कही। विधायक ने मामला संदिग्ध लगने पर कोई रकम नहीं दी और इसकी शिकायत पुलिस से कर दी।
सबसे बड़ा सवाल—आखिर ठग ने ऐसा दुस्साहस क्यों किया?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आखिर एक व्यक्ति को यह विश्वास कैसे हुआ कि वह किसी भाजपा विधायक से यह कह सकता है कि “पैसे दो, राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात करा दूंगा।”
क्या यह केवल एक शातिर ठग का अंदाजा था, या फिर उसे विधायक की राजनीतिक स्थिति और संगठन के भीतर उनकी पहुंच के बारे में ऐसी जानकारी थी जिसके आधार पर उसने यह दांव खेला? आखिर उसने यह क्यों माना कि ऐसा प्रस्ताव विधायक के सामने रखा जा सकता है?
पार्टी में वर्चस्व को लेकर भी उठने लगी चर्चा
इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा तेज हो गई है। यदि किसी विधायक की पार्टी संगठन में मजबूत पकड़ और शीर्ष नेतृत्व तक सहज पहुंच हो, तो क्या कोई ठग राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कराने के नाम पर लाखों रुपये मांगने का दुस्साहस करेगा?
यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या आरोपी ने विधायक की संगठनात्मक स्थिति का आकलन करने के बाद ही यह जाल बिछाया था, या फिर यह महज एक सामान्य ठगी की कोशिश थी जिसमें बड़े नाम का इस्तेमाल किया गया।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विधायक की पार्टी में वास्तविक भूमिका, उनका प्रभाव और राष्ट्रीय नेतृत्व से उनके संबंधों पर कोई निष्कर्ष उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। लेकिन यह घटना स्वाभाविक रूप से ऐसे सवाल जरूर खड़े करती है, जिनका उत्तर विधायक विवेक वर्मा या भाजपा संगठन ही बेहतर तरीके से दे सकते हैं।
आरोपी को विधायक की इतनी अंदरूनी जानकारी कैसे मिली?
इस मामले का एक बेहद गंभीर पहलू यह भी है कि फोन करने वाले को विधायक तक पहुंचने का आत्मविश्वास आखिर कहां से मिला।
क्या उसने पहले से विधायक की राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक स्थिति की जानकारी जुटाई थी? क्या वह केवल साइबर ठग था, या फिर उसे किसी माध्यम से ऐसी जानकारी मिली थी जिसके आधार पर उसने यह योजना बनाई?
यदि जांच में यह सामने आता है कि आरोपी के पास विधायक से जुड़ी अंदरूनी जानकारी थी, तो मामला केवल साइबर ठगी का नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करेगा।
बीसलपुर पुलिस कर रही है हर एंगल से जांच
इस पूरे मामले में पुलिस भी इसे सामान्य घटना मानकर नहीं चल रही है। बीसलपुर थाना प्रभारी ने बताया कि जिस मोबाइल नंबर से विधायक विवेक वर्मा को कॉल की गई थी, उसे तकनीकी माध्यम से ट्रेस कराया जा रहा है। पुलिस कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान, उसकी लोकेशन और उसके नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है।
थाना प्रभारी के अनुसार पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने विधायक तक पहुंचने और उनसे जुड़े राजनीतिक तथ्यों की जानकारी कैसे हासिल की। कहीं इसके पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह तो सक्रिय नहीं, जो जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली लोगों को राजनीतिक संपर्कों का झांसा देकर ठगी का प्रयास करता हो। उन्होंने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द पूरे घटनाक्रम का खुलासा करने का प्रयास किया जाएगा।
अब जवाब विधायक और जांच—दोनों से मिलने का इंतजार
फिलहाल यह मामला पुलिस जांच के अधीन है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। हालांकि, इस घटना ने कई स्वाभाविक सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। आखिर आरोपी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ही नाम क्यों लिया? विधायक विवेक वर्मा को ही निशाना क्यों बनाया? उसे यह भरोसा किस आधार पर हुआ कि राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात कराने के नाम पर पैसे मांगे जा सकते हैं?
इन सवालों के जवाब पुलिस जांच से सामने आएंगे या फिर स्वयं विधायक विवेक वर्मा और भाजपा संगठन इस पूरे मामले पर अधिक स्पष्टता देंगे। लेकिन इतना तय है कि साढ़े तीन लाख रुपये की इस कथित ठगी की कोशिश ने केवल एक साइबर अपराध का मामला नहीं, बल्कि भाजपा संगठन में राजनीतिक पहुंच, वर्चस्व और नेताओं की सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।