PoK Protest: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में पिछले डेढ़ महीने से जारी आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 5 जून से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन ने अब बड़ा जनआंदोलन का रूप ले लिया है। मंगलवार, 21 जुलाई को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा पाकिस्तान सरकार को दिया गया अंतिम अल्टीमेटम खत्म हो रहा है। रावलकोट में करीब 1.5 लाख प्रदर्शनकारी जमा हो चुके हैं और मांगें पूरी नहीं होने पर मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी कर ली गई है। पाकिस्तान सरकार ने हालात को देखते हुए हजारों अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए हैं।
5 जून से जारी है PoK में आंदोलन
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में 5 जून से लगातार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शुरुआत महंगाई और बिजली जैसे आर्थिक मुद्दों से हुई थी, लेकिन अब आंदोलन राजनीतिक अधिकारों और प्रशासनिक सुधारों की मांग तक पहुंच चुका है।
इन प्रदर्शनों के दौरान कई बार बाजार बंद रहे, सार्वजनिक परिवहन ठप रहा और विभिन्न शहरों में धरना-प्रदर्शन आयोजित किए गए।
JAAC का अल्टीमेटम आज खत्म, मुजफ्फराबाद मार्च की तैयारी
आंदोलन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान सरकार को 21 जुलाई तक मांगें मानने का अल्टीमेटम दिया था। संगठन ने साफ कहा है कि यदि इस तारीख तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
रावलकोट में करीब 1.5 लाख प्रदर्शनकारी जुट चुके हैं। भारी बारिश के बावजूद लोग अपने इरादों पर कायम हैं और मुजफ्फराबाद की ओर मार्च की तैयारी कर रहे हैं।
भारी बारिश भी नहीं रोक सकी प्रदर्शनकारियों का जोश
रावलकोट और आसपास के इलाकों में मंगलवार को भारी बारिश और थंडरस्टॉर्म की आशंका जताई गई है। इसके बावजूद हजारों लोग प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान 30 से ज्यादा लोगों की मौत
आंदोलन शुरू होने के बाद प्रदर्शनकारियों, स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बीच कई बार हिंसक झड़पें हुईं। इन घटनाओं में अब तक 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में आम नागरिकों के साथ कुछ सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल बताए जा रहे हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, 14 जुलाई को हुई हिंसा में कम से कम 9 लोगों की जान गई थी।
संयुक्त राष्ट्र ने मांगी स्वतंत्र जांच
PoK में बढ़ती हिंसा और लगातार हो रही मौतों के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी इस मामले पर चिंता जताई है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पाकिस्तान सरकार से नागरिकों और सुरक्षा बलों की सभी मौतों की “तत्काल, गहन और निष्पक्ष जांच” कराने की मांग की है। उन्होंने हिंसा की स्वतंत्र जांच कराने पर भी जोर दिया है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
हाल के दिनों में रावलकोट समेत कई इलाकों में लाखों लोगों की भागीदारी वाली रैलियां हुई हैं। अब आंदोलन केवल महंगाई तक सीमित नहीं रह गया है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- स्थानीय विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों की व्यवस्था समाप्त की जाए।
- स्थानीय लोगों को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिले।
- गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए।
- बिजली, महंगाई और अन्य आर्थिक समस्याओं का समाधान किया जाए।
- प्रशासनिक व्यवस्था और शासन में व्यापक सुधार किए जाएं।
पाकिस्तान ने 4000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी किए तैनात
बढ़ते आंदोलन को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने PoK में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार 4000 से अधिक रेंजर्स, पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स के जवान विभिन्न संवेदनशील इलाकों में तैनात किए गए हैं।
कई जगह प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।
क्यों अहम है 21 जुलाई?
21 जुलाई को JAAC द्वारा दिया गया अंतिम राजनीतिक अल्टीमेटम समाप्त हो रहा है। यदि पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सहमत नहीं होती, तो आंदोलन के और व्यापक और उग्र होने की संभावना जताई जा रही है।
ऐसे में पूरे पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और इस्लामाबाद की नजरें आज होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
फिलहाल क्या है स्थिति?
PoK में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक ओर लाखों प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कर रखी है। संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच की मांग के बाद इस आंदोलन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।