Panchayat: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक बेहद अनोखा मामला सामने आया है, जहां गांव की पंचायत ने एक पति को उसकी दो पत्नियों के बीच हफ्ते के हिसाब से बांटने का फैसला सुनाया है। पंचायत के अनुसार पति पहली पत्नी के साथ तीन दिन, दूसरी पत्नी के साथ तीन दिन रहेगा, जबकि सप्ताह का आखिरी दिन उसकी अपनी मर्जी पर होगा। इतना ही नहीं, पंचायत ने पहली पत्नी और उसकी बेटियों के भरण-पोषण के लिए हर महीने राशन और नकद खर्च देने का भी आदेश दिया है। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों ने पंचायत के इस फैसले को स्वीकार कर लिया है।
पहली पत्नी की शिकायत के बाद शुरू हुआ मामला
यह मामला रामपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर टांडा थाना क्षेत्र के दढ़ियाल नगर पंचायत का है। सोमवार को पहली पत्नी अशरा ने पुलिस चौकी पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके पति नजाकत दूसरी शादी के बाद से उसे और उसकी बेटियों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
अशरा का आरोप था कि पति उसके साथ नहीं रहता और घर खर्च के लिए भी पैसे नहीं देता, जिससे दो बेटियों का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
14 साल पहले हुई थी पहली शादी
जानकारी के मुताबिक, नजाकत की शादी करीब 14 साल पहले उत्तराखंड निवासी अशरा से हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां हैं।
करीब चार साल पहले नजाकत ने दूसरी शादी नेहा से कर ली। बताया गया कि उसने दूसरी शादी इसलिए की क्योंकि पहली पत्नी से बेटा नहीं हुआ था। हालांकि दूसरी पत्नी नेहा से भी उसे दो बेटियां ही हुईं।
वर्तमान में नजाकत दूसरी पत्नी नेहा के साथ रह रहा था, जबकि पहली पत्नी अलग रह रही थी।
पुलिस तक पहुंचा मामला, फिर बैठी पंचायत
पहली पत्नी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस मामले की जानकारी जुटा रही थी। इसी दौरान गांव के लोगों ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के लिए पंचायत बुला ली।
करीब तीन से चार घंटे तक चली पंचायत में दोनों पक्षों की बातें सुनी गईं। इसके बाद पंचों ने अपना फैसला सुनाया।
पंचायत ने सुनाया अनोखा फैसला
पंचायत ने फैसला दिया कि नजाकत अब सप्ताह में तीन दिन पहली पत्नी अशरा के साथ रहेगा और अगले तीन दिन दूसरी पत्नी नेहा के साथ रहेगा।
सप्ताह का सातवां दिन यानी वीकेंड पति की इच्छा पर छोड़ दिया गया। उस दिन वह अपनी पसंद के अनुसार किसी भी पत्नी के साथ रह सकता है।
पहली पत्नी को मिलेगा राशन और खर्च
पंचायत ने केवल रहने का समय तय नहीं किया, बल्कि पहली पत्नी और उसकी बेटियों के भरण-पोषण को लेकर भी फैसला सुनाया।
पंचायत के अनुसार नजाकत को हर महीने पहली पत्नी के घर पूरा राशन पहुंचाना होगा। इसके अलावा उसे 2,000 रुपये नकद खर्च भी देना होगा ताकि पहली पत्नी और उसकी बेटियों का पालन-पोषण हो सके।
दोनों पक्षों ने माना पंचायत का फैसला
बताया जा रहा है कि पंचायत का फैसला सुनने के बाद दोनों पक्षों ने इसे स्वीकार कर लिया। इसके बाद पहली पत्नी ने पुलिस में दी गई शिकायत को आगे नहीं बढ़ाया।
स्थानीय पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया है। फिलहाल पुलिस की ओर से कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
पुलिस ने क्या कहा?
स्थानीय पुलिस के अनुसार, यदि भविष्य में किसी भी पक्ष की ओर से दोबारा शिकायत मिलती है, तो मामले की जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पंचायत के फैसले के बाद विवाद शांत हो गया है और दोनों परिवारों ने समझौते पर सहमति जता दी है।