UP News: रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक बार फिर भारत के एक परिवार को गहरा जख्म दिया है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले 22 वर्षीय अभिषेक निषाद की यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर रूसी हमले में मौत हो गई। अभिषेक तुर्की की शिपिंग कंपनी के ‘गोल्डन लिओ’ जहाज पर सीमैन (नाविक) के रूप में काम कर रहे थे। 19 जुलाई को हुए हमले में उनकी जान चली गई। सोमवार को शिपिंग कंपनी के एजेंट ने परिवार को फोन कर इस दुखद खबर की जानकारी दी। बेटे की मौत की खबर सुनते ही पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
मां का रो-रोकर बुरा हाल, बोलीं- मेरा बेटा वापस ला दो
अभिषेक अपने माता-पिता की इकलौती संतान नहीं, बल्कि इकलौते बेटे थे। बेटे की मौत के बाद उनकी मां अनीता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। घर आने वाले हर व्यक्ति से वह एक ही बात कह रही हैं, “मेरी एक ही औलाद थी, मेरा हीरा बेटा था। खानदान में किसी ने पढ़ाई-लिखाई नहीं की थी। मैं उसे कैसे भूल जाऊं? मेरा बेटा कोई वापस ला दो।”
परिजनों के मुताबिक, इतना कहते ही वह कई बार बेहोश हो जाती हैं। वहीं, पिता कौशल निषाद पत्नी को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन खुद भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं।
बहनों का भी टूटा सहारा
अभिषेक की दो बहनें हैं। बड़ी बहन साधना सदमे में है और किसी से बात नहीं कर पा रही है। छोटी बहन अराधना भाई को याद कर फूट-फूटकर रो रही है।
वह कहती है, “मेरा एक ही भाई था। अब मैं किसकी कलाई पर राखी बांधूंगी?” परिवार के इस दर्द ने पूरे गांव को भावुक कर दिया है।
तुर्की के जहाज पर सीमैन था अभिषेक
अभिषेक निषाद तुर्की की शिपिंग कंपनी के ‘गोल्डन लिओ’ (Golden Leo) जहाज पर सीमैन (नाविक) के तौर पर काम कर रहे थे। जहाज यूक्रेन से सामान लेकर सीरिया जा रहा था।
19 जुलाई को जब जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर था, तभी रूस की ओर से हमला हुआ। इस हमले में अभिषेक की मौत हो गई। अगले दिन शिपिंग कंपनी के एजेंट ने फोन कर परिवार को इस दुखद घटना की जानकारी दी।
पिता ने कर्ज लेकर पूरा किया था बेटे का सपना
देवरिया के गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमेल गांव निवासी कौशल निषाद खेती-किसानी करते हैं और भाजपा के बूथ अध्यक्ष भी हैं। परिवार में पत्नी अनीता देवी, बेटा अभिषेक और दो बेटियां साधना व अराधना हैं।
अभिषेक ने साल 2022 में राम प्रकाश माल इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी। उनका सपना मर्चेंट नेवी में जाने का था।
घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद पिता ने बेटे का सपना पूरा करने के लिए करीब 5.5 लाख रुपये का कर्ज लिया और उन्हें लखनऊ के एक संस्थान में ट्रेनिंग के लिए भेजा।
बहनों की शादी और नया घर बनवाने का था सपना
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अभिषेक मुंबई गए और वहां से तुर्की पहुंचे। जहाज पर नौकरी मिलने के बाद उन्होंने घर फोन कर पिता से कहा था कि अब बड़ी बहन साधना की शादी की तैयारी शुरू कर दें।
उन्होंने कहा था कि वह बहनों की अच्छी जगह शादी करवाएंगे और परिवार के लिए नया घर भी बनवाएंगे।
उन्हें हर महीने 300 डॉलर (करीब 28,752 रुपये) वेतन मिलता था। जहाज पर रहने और खाने की व्यवस्था कंपनी की ओर से की जाती थी।
मौत की खबर सुनते ही बेसुध हो गए पिता
19 जुलाई की रात हुए हमले के बाद सोमवार को शिपिंग कंपनी के एजेंट ने अभिषेक के पिता को फोन कर उनके बेटे की मौत की जानकारी दी।
यह खबर सुनते ही पिता कौशल निषाद बेसुध हो गए। मां और दोनों बहनों का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे गांव में मातम का माहौल है।
दोस्त बोले- अभी भी यकीन नहीं हो रहा
अभिषेक के दोस्त नितीश ने बताया कि उन्हें अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि उनका दोस्त अब इस दुनिया में नहीं रहा।
उन्होंने बताया कि विदेश में नौकरी मिलने के बाद अभिषेक बेहद खुश था। कुछ दिन पहले उसने वीडियो कॉल पर यूक्रेन की स्थिति दिखाई थी और कहा था कि वहां बमबारी हो रही है तथा उसे काफी डर लग रहा है।
दोस्तों का कहना है कि अभिषेक बेहद मिलनसार, मेहनती और परिवार की जिम्मेदारियों को समझने वाला युवक था।
शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने परिवार से संपर्क किया है। भारतीय दूतावास और संबंधित शिपिंग कंपनी के सहयोग से अभिषेक का शव भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रशासन ने परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है ताकि जल्द से जल्द अभिषेक का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंच सके।
युद्ध ने छीन लिया परिवार का इकलौता सहारा
अभिषेक निषाद अपने परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद थे। पिता ने कर्ज लेकर उन्हें पढ़ाया, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर सके। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध ने परिवार का इकलौता बेटा उनसे छीन लिया।
अब पूरा परिवार सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहा है कि जिस बेटे के सहारे भविष्य के सपने देखे थे, वह इतनी कम उम्र में उन्हें छोड़कर क्यों चला गया।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).