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UP News: हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सपा MLA के चाचा ने सर्किट हाउस में पढ़ी नमाज, अब पड़े लेने क देने; हुई FIR..

UP News: हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सपा MLA के चाचा ने सर्किट हाउस में पढ़ी नमाज, अब पड़े लेने क देने; हुई FIR..

UP News: मुरादाबाद के सर्किट हाउस में सपा नेता हाजी मोहम्मद उस्मान के नमाज पढ़ने का वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठन ने सरकारी परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति पर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष रोहन सक्सेना ने प्रशासन से पूछा कि आखिर किस नियम के तहत सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई। वहीं, प्रशासन ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही और PWD जेई की तहरीर पर मझोला थाने में FIR दर्ज की गई है। हाजी उस्मान ने इसे इबादत का मामला बताते हुए कहा कि उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया।

सपा विधायक के चाचा हैं हाजी मोहम्मद उस्मान

हाजी मोहम्मद उस्मान समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हैं। वह मौजूदा बिलारी विधायक मोहम्मद फहीम इरफान के चाचा हैं। हाजी उस्मान पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी रह चुके हैं और अपने पैतृक गांव इब्राहीमपुर के प्रधान भी रहे हैं।

सपा की समीक्षा बैठक के बाद पढ़ी नमाज

सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने का वीडियो गुरुवार 3 सितंबर का बताया जा रहा है। उस दिन यूपी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव सर्किट हाउस में ठहरे हुए थे। उन्होंने सपा नेताओं के साथ समीक्षा बैठक की थी।

बैठक खत्म होने के बाद मोहम्मद उस्मान सर्किट हाउस से बाहर निकले और लॉन के पास नमाज पढ़ी। वीडियो में वह एक कार के बगल में नमाज अदा करते दिखाई दे रहे हैं। बताया गया है कि वीडियो एक सपा कार्यकर्ता ने ही बनाया था।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत आस्था का मामला बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग सरकारी परिसर में धार्मिक गतिविधि और उसके वीडियो को प्रचारित किए जाने पर सवाल उठा रहे हैं।

फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर सपा के स्थानीय नेतृत्व या मुरादाबाद जिला प्रशासन की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है।

राष्ट्रीय बजरंग दल ने प्रशासन से पूछा सवाल

राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश अध्यक्ष रोहन सक्सेना ने सर्किट हाउस में नमाज पढ़े जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि प्रशासन ने किस नियम के तहत नमाज अदा करने की अनुमति दी।

रोहन सक्सेना ने कहा कि प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि सपा नेता को किस हैसियत से सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ने के लिए जगह दी गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी विधायक के रिश्तेदार को सरकारी भवन में इस तरह की अनुमति देने का कोई नियम है।

उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई नियम नहीं है तो सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। रोहन सक्सेना का यह भी कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी सामाजिक संगठनों को बैठक के लिए सर्किट हाउस में जगह देने में आनाकानी करते हैं, तो फिर वहां नमाज पढ़ने की अनुमति कैसे दी गई।

हाजी उस्मान बोले- ये इबादत का मामला है

विवाद पर हाजी मोहम्मद उस्मान ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह वीडियो कब का है। उन्होंने बताया कि ऐसा कई बार होता है कि कहीं जाते हैं और उसी दौरान नमाज का वक्त हो जाता है, तो वहीं नमाज पढ़ लेते हैं।

उन्होंने कहा कि संभव है कि उन्होंने भी ऐसे ही किसी मौके पर नमाज पढ़ी हो। हाजी उस्मान के मुताबिक, यह इबादत का मामला है और उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया।

‘दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए’

हाजी मोहम्मद उस्मान ने अपने पक्ष में उदाहरण देते हुए कहा कि देश में शैक्षणिक कार्यक्रमों से पहले सरस्वती वंदना की परंपरा है और सरकारी निर्माण से पहले भूमि पूजन भी किया जाता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि उनके नमाज पढ़ने से न तो कोई रास्ता जाम हुआ और न ही किसी को कोई परेशानी हुई।

ADM बोले- जांच चल रही है, कार्रवाई की जाएगी

मुरादाबाद के एडीएम सिटी अंकित श्रीवास्तव ने बताया कि विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव का प्रोटोकॉल जिला प्रशासन को मिला था। इसी के तहत उनके लिए सर्किट हाउस में नियमानुसार ठहरने की व्यवस्था की गई थी।

ADM के मुताबिक, इसी दौरान उनसे मिलने पहुंचे सपा नेता के सर्किट हाउस में नमाज अदा करने का मामला सामने आया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से मामले में कार्रवाई की जा रही है।

PWD JE की तहरीर पर FIR दर्ज

प्रशासन की कार्रवाई के बाद PWD जेई अनित कुमार ने मझोला थाने में तहरीर दी। तहरीर में बताया गया कि सपा नेता हाजी मोहम्मद उस्मान ने सर्किट हाउस के रास्ते में अपनी गाड़ी खड़ी कर दी और उसके पीछे नमाज पढ़ी।

तहरीर के मुताबिक, गाड़ी खड़ी होने और नमाज पढ़ने के कारण सर्किट हाउस में आने-जाने वाले लोगों और वाहनों को परेशानी हुई। इसके आधार पर मझोला थाने में BNS की धारा 285 और 292 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

हाजी मोहम्मद उस्मान पहले भी विवादों में रहे

हाजी मोहम्मद उस्मान का नाम पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान बिलारी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की चुनावी जनसभा में मोहम्मद उस्मान ने भाषण दिया था।

इस मामले में उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।

जाति प्रमाणपत्र विवाद में भी आया था नाम

हाजी मोहम्मद उस्मान का नाम जाति प्रमाणपत्र विवाद में भी सामने आ चुका है। एक शिकायत के बाद जिला स्तरीय सत्यापन समिति ने मामले की जांच की थी।

जांच में विधायक मोहम्मद फहीम और उनके चाचा मोहम्मद उस्मान के अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC की झोझा जाति के प्रमाणपत्र नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए थे।

विधायक समेत परिवार के चार OBC प्रमाणपत्र निरस्त

जांच के बाद प्रशासन ने विधायक मोहम्मद फहीम, हाजी मोहम्मद उस्मान और उनकी दो बेटियों फरहीन जहां और समरीन जहां के OBC जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए थे।

यह मामला भी हाजी मोहम्मद उस्मान और विधायक मोहम्मद फहीम से जुड़े पुराने विवादों में शामिल रहा है।

पूर्व विधायक के छोटे भाई हैं हाजी उस्मान

हाजी मोहम्मद उस्मान बिलारी के पूर्व विधायक हाजी मोहम्मद इरफान के छोटे भाई हैं। वहीं, मौजूदा बिलारी विधायक मोहम्मद फहीम इरफान उनके भतीजे हैं।

इस तरह हाजी उस्मान का स्थानीय राजनीति में भी लंबे समय से जुड़ाव रहा है। वह समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हैं।

सार्वजनिक जगहों पर नमाज को लेकर हाईकोर्ट का फैसला

मई 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक भूमि पर नमाज पढ़ने को लेकर एक फैसला सुनाया था। जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कहा था कि सार्वजनिक भूमि पर सभी का समान अधिकार होता है और उसका एकतरफा उपयोग कानूनी तौर पर स्वीकार्य नहीं है।

इस फैसले का मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी समर्थन किया था। मौलाना ने कहा था कि इस्लाम में साफ तौर पर कहा गया है कि ऐसी जगह पर नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए, जहां कोई विवाद हो, तमाशा खड़ा हो या किसी को ऐतराज अथवा आपत्ति हो।

सर्किट हाउस सरकारी संपत्ति, लेकिन आम जनता के लिए खुला नहीं

सर्किट हाउस एक सरकारी संपत्ति है, जिसका निर्माण जनता के टैक्स के पैसे से होता है। हालांकि, यह आम जनता के लिए खुली सार्वजनिक संपत्ति नहीं होती है।

अब मुरादाबाद सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने के मामले में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर है। विवाद का केंद्र यही है कि सरकारी परिसर में नमाज पढ़ने के लिए क्या अनुमति थी और क्या इससे वहां आने-जाने वाले लोगों को वास्तव में परेशानी हुई।