Saharanpur Masjid ढहाए जाने के बाद अब मौके से मिले एक कुएं ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। मलबा हटाने के दौरान एक भारी स्लैब मिला। जब पोकलैंड मशीन से यह स्लैब नहीं टूटा तो प्रशासन ने कटर से इसे कटवाया। स्लैब हटने के बाद उसके नीचे करीब 20 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा कुआं दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने कुएं को लोहे की चादर से ढक दिया है, ताकि उसमें मलबा न जाए।
मौके पर अब भारी पुलिस फोर्स तैनात है और बैरिकेडिंग कर किसी को कुएं के पास जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। प्रशासन ने कुएं की उम्र और ऐतिहासिक स्थिति का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI को बुलाया है। इसी बीच मस्जिद की शिकायत करने वाले विकास त्यागी ने दावा किया है कि उन्हें पहले से शक था कि यहां कोई पुराना पूजा स्थल हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि यहां पहले मंदिर रहा होगा, जिसे तोड़कर बाद में मस्जिद बनाई गई।
मलबा हटाते समय मिला भारी स्लैब, काटने पर सामने आया कुआं
मस्जिद ढहाए जाने के बाद जब मलबा हटाने का काम चल रहा था, तभी वहां एक भारी पत्थर का स्लैब मिला। बताया गया कि पोकलैंड मशीन से इसे हटाना या तोड़ना संभव नहीं हो रहा था। इसके बाद कटर की मदद से स्लैब को काटा गया।
स्लैब कटने के बाद उसके नीचे कुआं दिखाई दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कुआं करीब 20 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा है। कुएं के ऊपर पत्थर का स्लैब लगा हुआ था, जिसकी वजह से वह मलबे के नीचे दबा हुआ था।
कुएं में मलबा न जाए और किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसके लिए पुलिस ने उसे लोहे की चादर से ढक दिया है।
कुआं कितना पुराना? ASI करेगी जांच
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह कुआं कितना पुराना है और इसका इस जगह के इतिहास से क्या संबंध है। प्रशासन ने इसकी जांच के लिए ASI को बुलाया है।
कुएं की उम्र, निर्माण शैली और उसकी ऐतिहासिक स्थिति की जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि यह संरचना कितनी पुरानी है। फिलहाल इसके आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि कुआं किसी पुराने मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल से जुड़ा था।
शिकायतकर्ता विकास त्यागी का दावा- मेरा शक सही साबित हुआ
मस्जिद की शिकायत करने वाले विकास त्यागी ने कुआं मिलने के बाद अपने पुराने दावे को दोहराया। उनका कहना है कि उन्हें पहले से शक था कि इस जगह पर कभी कोई पुराना पूजा स्थल रहा होगा।
विकास त्यागी ने दावा किया कि मलबा हटाने के बाद कुआं मिलने से उनका शक सही साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि यहां पहले मंदिर रहा होगा और उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई होगी।
उनका यह भी दावा है कि कुआं कई सौ साल पुराना हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कुएं की उम्र और उसकी ऐतिहासिक स्थिति की बाकायदा पुरातत्व विभाग से जांच कराई जाए।
हालांकि, मंदिर होने और कुएं के कई सौ साल पुराने होने का दावा अभी जांच का विषय है। ASI की जांच और उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड से ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मस्जिद टूटी,कुआं मिला..
बड़ी खबर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में 5 सितंबर 2026 को अदालत के आदेश पर अवैध मस्जिद को ध्वस्त किया था। इसके बाद जब प्रशासन वहां से मलबा हटा रहा था,तो मस्जिद के ठीक नीचे एक प्राचीन कुआँ मिला है।
शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने कहां मुझे पहले… pic.twitter.com/RePlSs7TL7— Tushar Rai (@tusharcrai) September 6, 2026
मस्जिद की उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे
दूसरी तरफ मुस्लिम धर्मगुरुओं और मस्जिद पक्ष की ओर से मस्जिद को करीब 100 साल पुरानी बताया जा रहा है। उनका दावा है कि 70 साल पुराने वक्फ दस्तावेजों में भी इस मस्जिद का जिक्र मौजूद है।
मस्जिद पक्ष का कहना है कि इस कार्रवाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और उन्हें हाईकोर्ट में अपील करने का पर्याप्त मौका नहीं मिला।
वकील बाबर वसीम ने कहा है कि मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा।
16 घंटे बुलडोजर चला, रविवार सुबह तक हटाया गया मलबा
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को मस्जिद को गिराने की कार्रवाई शुरू हुई थी। करीब 16 घंटे तक बुलडोजर चलने के बाद मस्जिद को ढहा दिया गया।
रविवार सुबह तक मौके से मलबा हटाने का काम चलता रहा। इसी दौरान भारी स्लैब के नीचे कुआं मिलने की बात सामने आई।
प्रशासन का कहना है कि मस्जिद को कोर्ट के आदेश के बाद गिराया गया। वहीं मस्जिद पक्ष का आरोप है कि उसे हाईकोर्ट में अपील का मौका नहीं दिया गया।
कुआं मिलने के बाद शुरू हुई सियासत
कुएं के सामने आने के बाद सहारनपुर की इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने मस्जिद गिराने और कुएं से जुड़े दावों पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है।
आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि वे इस मामले की लड़ाई सदन, कोर्ट और सड़क पर लड़ेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि मस्जिद गिराने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई।
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए लिखा कि क्या वह सहारनपुर जाकर अवैध इमारत के मलबे के सामने फातिहा पढ़ेंगे? उन्होंने लिखा कि यूपी यह पूछ रहा है कि इसका जवाब दिया जाए।
संगीत सोम बोले- मस्जिद नहीं, अवैध बिल्डिंग गिराई गई
बीजेपी नेता संगीत सोम ने इस मामले को अलग तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा कि सहारनपुर में मस्जिद का ध्वस्तीकरण नहीं किया गया, बल्कि अवैध जमीन पर बनी अवैध बिल्डिंग को गिराया गया है।
संगीत सोम ने कुएं को लेकर दावा किया कि यह 400 साल पुराना कुआं है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जितनी भी इस तरह की अवैध बिल्डिंग होंगी, उन्हें गिराया जाएगा और कोई बिल्डिंग नहीं छोड़ी जाएगी।
उन्होंने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में इस बात की होड़ लगी है कि मुसलमानों का आका कौन है- राहुल गांधी, अखिलेश यादव या ओवैसी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कुएं की वास्तविक उम्र अभी आधिकारिक जांच का विषय है। इसलिए 400 साल पुराना होने का दावा फिलहाल राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जा रहा है।
संजय सिंह ने पूजा स्थल अधिनियम का हवाला दिया
AAP सांसद संजय सिंह ने मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को संविधान का उल्लंघन बताया। उन्होंने पूजा स्थल अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि 1947 से पहले मौजूद धार्मिक स्थलों के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।
संजय सिंह ने दावा किया कि सहारनपुर की यह मस्जिद 1911 की थी और इसे तोड़ दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई के जरिए उत्तर प्रदेश का माहौल खराब किया गया है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता से बीजेपी के खिलाफ हमला बोलते हुए कहा कि लोगों को इस तरह की राजनीति में नहीं फंसना चाहिए। उनका आरोप है कि चुनाव से कुछ महीने पहले हिंदू-मुसलमानों को लड़ाने की कोशिश की जा रही है।
अब कुएं की जांच से साफ होगी तस्वीर
फिलहाल सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मिले कुएं ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है। एक तरफ शिकायतकर्ता विकास त्यागी का दावा है कि यहां पहले मंदिर था और मस्जिद उसके बाद बनाई गई। दूसरी तरफ मस्जिद पक्ष इसे करीब 100 साल पुरानी मस्जिद बता रहा है और पुराने वक्फ दस्तावेजों का हवाला दे रहा है।
अब इस विवाद में सबसे अहम भूमिका ASI की जांच और ऐतिहासिक रिकॉर्ड की होगी। कुआं कितना पुराना है, उसका निर्माण किस दौर का है और क्या उसका किसी पुराने धार्मिक स्थल से कोई संबंध है- इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल पाएंगे।
फिलहाल प्रशासन ने कुएं को सुरक्षित कर दिया है और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। बैरिकेडिंग के जरिए लोगों की आवाजाही भी नियंत्रित की जा रही है। कुएं की जांच के साथ-साथ मस्जिद गिराए जाने को लेकर कानूनी लड़ाई भी आगे बढ़ने की संभावना है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).