3

Recent News

Pilibhit SIR: वोटर लिस्ट गड़बड़ी के 3 आरोपियों को बचाने के लिए Form-8 का खेल? कांग्रेस के कुमुद गंगवार का चौंकाने वाला दावा..
Abhishek Sharma Record: सिर्फ 27 रन की पारी में रचा इतिहास, रोहित शर्मा को पछाड़कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड!

Abhishek Sharma Record: अभिषेक शर्मा न्यूजीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च टी20 मुकाबले में बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन अपनी छोटी…

Punjab Brutal Murder: घर में घुसकर युवक की हत्या, हाथ काटकर लिफाफे में रखा, फिर दुकानदार को थमाया..

Punjab Brutal Murder: पंजाब के लुधियाना में बदमाशों ने घर में घुसकर शक्ति नाम के युवक पर तेजधार हथियारों से…

Delhi News: दिल्ली के सरकारी स्कूल में 12वीं की छात्रा की मौत, जली हुई हालत में मिली; 3 पन्नों का नोट में लिखा दर्द?

Delhi News: दिल्ली के शाहदरा जिले के कृष्णा नगर स्थित एक सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा की 17 वर्षीय छात्रा…

UP MLC Election 2026: 20 शहरों में हंगामा, सपा प्रत्याशी फूट-फूटकर रोए; बोले- जामा मस्जिद जाकर इस्लाम कबूल कर लूंगा!
3

Recent News

Abhishek Sharma Record: अभिषेक शर्मा न्यूजीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च टी20 मुकाबले में बड़ी पारी नहीं खेल पाए, लेकिन अपनी छोटी…

Punjab Brutal Murder: पंजाब के लुधियाना में बदमाशों ने घर में घुसकर शक्ति नाम के युवक पर तेजधार हथियारों से…

Delhi News: दिल्ली के शाहदरा जिले के कृष्णा नगर स्थित एक सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा की 17 वर्षीय छात्रा…

Breaking News

राज-उद्धव की जोड़ी फिर एक मंच पर, गूंज उठा मराठी स्वाभिमान

ठाकरे परिवार की 20 साल बाद ऐतिहासिक एकता: ‘मराठी अस्मिता’ की हुंकार, राज और उद्धव साथ आए मंच पर

राज-उद्धव की जोड़ी फिर एक मंच पर, मराठी स्वाभिमान की हुंकार बनी ऐतिहासिक रैली

महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को वह दृश्य देखने को मिला, जिसकी लोगों ने उम्मीद तक छोड़ दी थी। करीब दो दशकों बाद, एक ही मंच पर ठाकरे परिवार के दो चचेरे भाइयों—राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे—ने एक साथ उपस्थिति दर्ज कराई। मौका था ‘आवाज मराठीचा’ नामक महारैली का, जो मुंबई के वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में आयोजित हुई थी।

राज-उद्धव की जोड़ी फिर एक मंच पर, तीन भाषा नीति का यू-टर्न बना रैली का केंद्र

हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूलों में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने का प्रस्ताव आया था, जिसे राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मराठी अस्मिता पर हमला करार दिया। जन आक्रोश और विपक्षी दलों के दबाव के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वह प्रस्ताव वापस ले लिया और एक समीक्षा समिति गठित कर दी।

इस फैसले को मराठी स्वाभिमान की जीत और जनजागरण का परिणाम मानते हुए ही यह महारैली आयोजित की गई, जिसमें हजारों की भीड़ मौजूद रही।

मजार जिहाद: गाजियाबाद में मेयर का एक्शन-मची खलबली

 “जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने कर दिखाया”

रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा—

“मैंने हमेशा कहा है कि मेरा महाराष्ट्र किसी भी राजनीति और लड़ाई से बड़ा है। आज 20 साल बाद मैं और उद्धव एक मंच पर हैं। जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने कर दिखाया—हम दोनों को साथ लाने का काम।”

उन्होंने साफ तौर पर यह चेतावनी भी दी कि—

“अगर किसी ने मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की कोशिश की, तो मराठी माणूस का असली बल देखेगा।”

उद्धव ठाकरे बोले—यह भाषाई आपातकाल था

उद्धव ठाकरे ने मंच से भावनात्मक शब्दों में कहा—

“हम यहां कोई राजनीतिक भाषण देने नहीं आए। यह एकता का उत्सव है। यह केवल हिंदी विरोध नहीं, यह हमारी मातृभाषा मराठी की रक्षा है। सरकार ने भाषा के नाम पर जो आदेश निकाला था, वह एक प्रकार का भाषाई आपातकाल था।”

 मंच से उठी मराठी संस्कृति की आवाज़

रैली का माहौल किसी सांस्कृतिक आयोजन जैसा था, जिसमें मराठी लोकगीत, ढोल-ताशा, और मराठी फिल्मों के गीत गूंजते रहे। एक पल ऐसा भी आया जब ‘ठाकरे’ फ़िल्म के गीत के साथ दोनों नेताओं की मंच पर एंट्री हुई, जिससे बाळासाहेब ठाकरे की यादें ताजा हो गईं।

राज-उद्धव की जोड़ी फिर एक मंच पर, राजनीतिक समीकरणों में बड़ा मोड़

यह मंच न सिर्फ मराठी गौरव का प्रतीक बना, बल्कि यह संकेत भी दे गया कि आने वाले समय में महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। राज और उद्धव की यह नज़दीकी महज भाषाई मुद्दे तक सीमित न रहकर चुनावी गठबंधन की जमीन भी तैयार कर सकती है।

मेयर सुनीता दयाल का संदर्भ: अस्मिता की रक्षा केवल भाषाई नहीं

गाजियाबाद की महापौर सुनीता दयाल द्वारा अवैध मजारों पर की गई कार्रवाई का उदाहरण भी महाराष्ट्र की रैली में अप्रत्यक्ष रूप से झलका—यह बताने के लिए कि जब नेतृत्व दृढ़ इच्छाशक्ति से जनता की भावना को समझता है, तो चाहे धार्मिक अतिक्रमण हो या भाषाई जुल्म—हर मोर्चे पर जनता की जीत संभव है।

 यह केवल मंच नहीं, मराठी अस्मिता की ‘पुनर्जन्म’ है

‘आवाज मराठीचा’ रैली महाराष्ट्र के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है—जहाँ निजी विवादों से ऊपर उठकर दो प्रमुख नेता जनता के हक की बात करने मंच पर आए। यह नज़ारा मराठी जनमानस के आत्मसम्मान की पुष्टि है, और आने वाले चुनावों में इसका प्रभाव निश्चित ही व्यापक होगा।

पेड़ की डाल पर दर्दनाक मंजर, मादा तेंदुआ की मौत