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UP News: Mahoba में तेज रफ्तार DCM बरगद के पेड़ से टकराई। हादसे में 20 खच्चरों की मौत हुई और एक ही परिवार के 12 लोग घायल हो गए।

महोबा में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार डीसीएम बरगद के पेड़ से टकराई, 20 खच्चरों की मौत, एक ही परिवार…

महोबा में यूट्यूब वीडियो देखकर मशाल बनाने की कोशिश मासूम को भारी पड़ गई। आग की लपटों में झुलसा 9 वर्षीय बच्चा, अस्पताल में भर्ती।

Mahoba News: यूट्यूब पर मशाल बनाने का वीडियो देख मासूम ने दोहराया खतरनाक प्रयोग, आग की लपटों में झुलसा 9 …

Pilibhit News: घुंघचाई के उदरहा मोड़ पर बस और ई-रिक्शा की टक्कर में 2 लोगों की मौत, 2 घायल। पुलिस ने बस कब्जे में लेकर जांच शुरू की।

Pilibhit News: घुंघचाई के उदरहा मोड़ पर दर्दनाक सड़क हादसा, बस की टक्कर से ई-रिक्शा सवार दो लोगों की मौत…

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल-रेस्टोरेंट में भीषण आग से 20 लोगों की मौत और 40 से ज्यादा घायल। राहत-बचाव जारी, जांच शुरू।

Delhi Fire News: मालवीय नगर के होटल-रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग, 20 लोगों की मौत; 40 से ज्यादा घायल, जान…

गाजियाबाद के सूर्या हत्याकांड में पीलीभीत कनेक्शन सामने आया। मुख्य आरोपी असद के करीबी फरहान और आतिफ गिरफ्तार, जांच में नए खुलासे।

सूर्या चौहान हत्याकांड का पीलीभीत कनेक्शन, मुख्य आरोपी असद के दो करीबी गिरफ्तार; बकरीद के दिन हुई हत्या  गाजियाबाद में…

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Pilibhit: बाघों की धरती पर लापरवाही का साया, इंसानों की गलती ने प्रकृति का दिल तोड़ दिया

पीलीभीत: बाघों के लिए मशहूर, लेकिन वन विभाग की लापरवाही ने किया सबको हैरान

Pilibhit:  प्राकृतिक धरोहर के बीच सवालों का साया

उत्तर प्रदेश का पीलीभीत जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बाघों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता है। यहां का टाइगर रिजर्व दुनिया भर में मशहूर है और बाघों के लिए यह इलाका एक सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। लेकिन हाल के दिनों में कुछ घटनाओं ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और उनकी जिम्मेदारी पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

Pilibhit:  थाने में बंधा लंगूर, वायरल हुआ वीडियो

ताज़ा मामला बिलसंडा थाना क्षेत्र से सामने आया, जहां थाने के भीतर एक लंगूर को रस्सी से बांधकर रखा गया। दावा किया गया कि यह लंगूर बंदरों को आबादी से भगाने के लिए वहां रखा गया था। हैरानी की बात यह है कि वीडियो वायरल होने के बाद भी वन विभाग ने न तो मौके का मुआयना किया और न ही किसी तरह की औपचारिक कार्रवाई की। बताया जाता है कि आंतरिक स्तर पर अधिकारियों ने सिर्फ मौखिक रूप से लंगूर को छोड़ने का निर्देश दिया और मामला वहीं दबा दिया गया।

पहले भी हुई है गंभीर चूक: तेंदुए की मौत का मामला

बीते दिनों पीलीभीत में एक मादा तेंदुआ कार की टक्कर से मारी गई थी। इस मामले में गाड़ी और आरोपी दोनों की पहचान होने के बावजूद वन विभाग अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर सका। आरोपी ने विभागीय लापरवाही का फायदा उठाकर अदालत से राहत पा ली और आज भी खुलेआम घूम रहा है। इस घटना ने साबित कर दिया कि संरक्षण कानून सिर्फ कागजों में सख्त हैं, लेकिन जमीन पर उनकी लागू करने की रफ्तार बेहद धीमी है।

Pilibhit:  भारत में वन्यजीव संरक्षण की अहमियत

भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम को बेहद गंभीरता से लिया जाता है और यही वजह है कि दुनिया के कुल बाघों का 60% से अधिक भारत में सुरक्षित रूप से रह रहा है। लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी नियमों को नजरअंदाज करते हैं, तो यह कानून सिर्फ एक औपचारिक दस्तावेज बनकर रह जाते हैं। लंगूर और तेंदुए जैसे मामले इस बात का सबूत हैं कि केवल बाघों पर ध्यान केंद्रित करना बाकी वन्यजीवों के साथ नाइंसाफी है।

Pilibhit:  वायरल वीडियो के बाद भी चुप्पी

लंगूर को बांधने वाला वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ी। सवाल यह है कि क्या वन विभाग के संरक्षण का दायरा सिर्फ टाइगर रिजर्व तक सीमित है? या फिर छोटे-बड़े सभी जीवों के लिए समान रूप से काम करने की जिम्मेदारी है? विभाग की चुप्पी और कार्रवाई से बचने का रवैया पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर संदेह पैदा करता है।

Pilibhit:  जवाबदेही तय करना जरूरी

पीलीभीत की प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि त्वरित और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। वन विभाग को ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और भविष्य में इस तरह की लापरवाही रोकने के ठोस उपाय करने होंगे। तभी संरक्षण के असली मायने पूरे हो पाएंगे और पीलीभीत अपनी सही पहचान को बनाए रख सकेगा।

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