पीलीभीत न्यूज़: जन्मजात कटे होंठ से जूझ रहे मासूम अब्बास को मिला नया जीवन, RBSK योजना से मिली नई मुस्कान
जब मुस्कान भी किस्मत की मोहताज हो जाए…
कुछ कहानियां सिर्फ इलाज की नहीं होतीं, बल्कि उम्मीद, संवेदनशील शासन और इंसानियत की भी होती हैं। पीलीभीत के अमरिया विकासखंड के छोटे से गांव मुंडलिया गौसू में रहने वाले मासूम अब्बास की कहानी भी ऐसी ही है। जन्म से कटे होंठ (Cleft Lip) की समस्या लेकर दुनिया में आए इस बच्चे की मुस्कान जैसे अधूरी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि महंगे ऑपरेशन का खर्च उठा सके। माता-पिता हर दिन अपने बेटे का चेहरा देखते थे, लेकिन इलाज उनकी पहुंच से बहुत दूर था।
ऐसे समय में उत्तर प्रदेश सरकार की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) योजना उस परिवार के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई। सरकारी व्यवस्था, स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों की संवेदनशील पहल ने न केवल एक मासूम के चेहरे पर मुस्कान लौटाई, बल्कि पूरे परिवार को भविष्य की नई उम्मीद भी दे दी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) क्या है और क्यों है खास?
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना है।
इस योजना के तहत विशेष रूप से बच्चों में पाए जाने वाले चार प्रमुख वर्गों (4Ds) पर ध्यान दिया जाता है—
जन्मजात विकृतियां (Birth Defects)
जन्म के समय होने वाली बीमारियां (Deficiencies)
विभिन्न रोग (Diseases)
विकास संबंधी देरी एवं दिव्यांगता (Developmental Delays including Disabilities)
देशभर में प्रशिक्षित आरबीएसके टीमें गांवों, आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती हैं। जिन बच्चों में गंभीर समस्या पाई जाती है, उन्हें जिला स्तर से लेकर सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों तक निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
आर्थिक मजबूरी बनी इलाज में सबसे बड़ी बाधा
पीलीभीत के अमरिया विकासखंड के ग्राम मुंडलिया गौसू निवासी अब्बास जन्म से ही कटे होंठ की समस्या से पीड़ित था। यह समस्या केवल चेहरे की बनावट तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आगे चलकर बच्चे के बोलने, भोजन करने और मानसिक विकास पर भी असर डाल सकती है।
परिवार इलाज कराना चाहता था, लेकिन आर्थिक संसाधन इतने नहीं थे कि लाखों रुपये तक पहुंचने वाले उपचार का खर्च उठा सके। ऐसे में परिवार के सामने बेबसी के अलावा कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।
गांव पहुंची RBSK टीम ने बदली मासूम की किस्मत
इसी बीच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए गांव पहुंची।
टीम-ए, अमरिया की डॉ. समन इसरार, अरुण कुमार (ऑप्टोमेट्रिस्ट) तथा गायत्री (एएनएम) ने स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अब्बास की स्थिति को गंभीरता से पहचाना।
टीम ने न केवल बीमारी की जानकारी दी, बल्कि परिवार को यह भी समझाया कि सरकार इस तरह की जन्मजात विकृतियों का उपचार पूरी तरह निःशुल्क कराती है। परिवार को विश्वास दिलाया गया कि यदि वे आगे आएं तो बच्चे का बेहतर इलाज संभव है।
यही वह क्षण था, जहां से एक परिवार की निराशा उम्मीद में बदलने लगी।
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने निभाई जिम्मेदारी, आगरा में हुआ सफल ऑपरेशन
आरबीएसके टीम की पहल के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय तथा जिला आरबीएसके कार्यक्रम ने पूरे मामले को प्राथमिकता से आगे बढ़ाया।
बच्चे को सारस्वत हॉस्पिटल, आगरा भेजा गया, जहां विशेषज्ञ प्लास्टिक एवं पुनर्निर्माण सर्जनों ने जन्मजात कटे होंठ का सफल ऑपरेशन किया।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि परिवार को इलाज के लिए कोई आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा। पूरा उपचार सरकार की योजना के अंतर्गत निःशुल्क कराया गया।अब ऑपरेशन के बाद अब्बास तेजी से स्वस्थ हो रहा है और सामान्य जीवन की ओर बढ़ रहा है।
एक सफल ऑपरेशन नहीं, पूरे परिवार की बदली जिंदगी
किसी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए बच्चे की गंभीर बीमारी केवल स्वास्थ्य का संकट नहीं होती, बल्कि वह पूरे परिवार के भविष्य पर चिंता की छाया बन जाती है।
अब्बास के माता-पिता के लिए यह केवल एक ऑपरेशन नहीं था। यह उस डर का अंत था कि कहीं उनका बेटा जीवनभर सामाजिक संकोच और शारीरिक परेशानी के साथ न जीए।
परिवार ने उत्तर प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य विभाग और आरबीएसके टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी योजना ने उनके बच्चे को नई मुस्कान और नया जीवन दिया है। उनके अनुसार, यदि यह योजना न होती तो शायद वे कभी इस इलाज का खर्च नहीं उठा पाते।
सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं, जब अधिकारी संवेदनशील हों
सरकारी योजनाएं कागजों पर बनती हैं, लेकिन उनका वास्तविक असर तब दिखाई देता है जब जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारी और अधिकारी उन्हें पूरी जिम्मेदारी से लागू करते हैं।
अमरिया की आरबीएसके टीम ने केवल बीमारी की पहचान नहीं की, बल्कि परिवार को समझाया, विश्वास दिलाया, कागजी प्रक्रिया में सहयोग किया और उपचार तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी निभाई।
यही संवेदनशीलता किसी भी जनकल्याणकारी योजना की वास्तविक सफलता का आधार बनती है।
जन्मजात बीमारियों को नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों के अनुसार यदि जन्मजात कटे होंठ जैसी समस्याओं का समय रहते उपचार करा दिया जाए तो बच्चे का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास सामान्य रूप से संभव है।
इसलिए यदि किसी बच्चे में जन्म से कोई शारीरिक विकृति दिखाई दे तो उसे भाग्य या अंधविश्वास से जोड़ने के बजाय तुरंत स्वास्थ्य विभाग अथवा आरबीएसके टीम से संपर्क करना चाहिए।
जरूरतमंद परिवार ऐसे उठा सकते हैं योजना का लाभ
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जन्मजात बीमारी से ग्रसित बच्चों के निःशुल्क उपचार के लिए पीलीभीत जिले में डीईसी प्रबंधक मोहम्मद जुबैर से भी संपर्क किया जा सकता है।
संपर्क नंबर: 7536844761
सरकारी योजनाएं ईमानदारी से जमीन पर लागू हों तब आती है ऐसी मुस्कान सरकार!
अक्सर सरकारी योजनाओं की चर्चा आंकड़ों और बजट तक सीमित रह जाती है। लेकिन जब कोई योजना किसी गरीब परिवार के बच्चे की जिंदगी बदल देती है, तब उसका वास्तविक महत्व समझ में आता है।
अब्बास की मुस्कान इस बात की गवाही देती है कि यदि सरकारी योजनाएं ईमानदारी से जमीन पर लागू हों, अधिकारी संवेदनशीलता के साथ काम करें और जरूरतमंद परिवार समय पर आगे आएं, तो कई बच्चों का भविष्य बदला जा सकता है।
यह कहानी केवल एक सफल ऑपरेशन की नहीं, बल्कि भरोसे, मानवीय संवेदना और उस व्यवस्था की है जिसने एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के चेहरे पर राहत और दुआओं की मुस्कान लौटा दी।