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पीलीभीत न्यूज़: मासूम अब्बास को RBSK योजना के तहत जन्मजात कटे होंठ का मुफ्त ऑपरेशन। सरकारी पहल से लौटी मुस्कान, गरीब परिवार को मिली नई उम्मीद।

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पीलीभीत में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत 86 शिक्षकों को हेल्थ कार्ड वितरित। मिलेगा कैशलेस इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा।

शिक्षकों के स्वास्थ्य सुरक्षा कवच को मिली नई ताकत: पीलीभीत में ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ, 86 शिक्षकों…

पीलीभीत को कृषि निर्यात हब बनाने की बड़ी पहल। 27 परियोजनाओं का लोकार्पण, हाईटेक नर्सरी, आधुनिक मंडियां, खेती और किसानों को नई सौगात।

पीलीभीत को मिला कृषि विकास का नया विजन: हाईटेक नर्सरी, एक्सपोर्ट सेंटर और आधुनिक मंडियों से किसानों की बदलेगी तस्वीर…

पीलीभीत, पूरनपुर तराई क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी। 26 जुलाई से कासगंज–ऐशबाग एक्सप्रेस शुरू होगी, यात्रियों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी सुविधा।

पीलीभीत रेल कनेक्टिविटी को मिली नई रफ्तार: कासगंज–ऐशबाग एक्सप्रेस से बदलेगी तराई की तस्वीर पीलीभीत। वर्षों से जिस रेल सेवा…

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UP News: पीलीभीत एनकाउंटर और महाकुंभ में “डरेंगे तो मरेंगे” के होर्डिंग्स, क्यों सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट ?

UP News: उत्तर प्रदेश में दो अलग-अलग घटनाओं ने सियासी और सामाजिक माहौल को गर्मा दिया है। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान लगे “डरेंगे तो मरेंगे” जैसे होर्डिंग्स और पीलीभीत में खालिस्तानी आतंकियों के एनकाउंटर के बाद पन्नू की धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। दोनों घटनाएं एक तरफ सामाजिक एकजुटता और धार्मिक आयोजनों के महत्त्व को दर्शाती हैं, वहीं दूसरी तरफ आतंकी खतरे की ओर इशारा करती हैं।

प्रयागराज महाकुंभ: “डरेंगे तो मरेंगे” होर्डिंग्स से खास संदेश

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य की ओर से लगाए गए होर्डिंग्स ने लोगों का ध्यान खींचा। इन होर्डिंग्स में लिखा गया है, “डरेंगे तो मरेंगे” और “सभी हिंदुओं में एकता हो, वक्फ के नाम पर संपत्ति की लूट बंद हो“।

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1 किलोमीटर के दायरे में लगाए गए 25 होर्डिंग्स के बैकग्राउंड में बंद मुट्ठी की तस्वीर का शैडो दिया गया है। इसके माध्यम से सनातन धर्म के अनुयायियों को एकजुट होने का संदेश दिया गया है।
इन होर्डिंग्स के पीछे का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान “बटेंगे तो कटेंगे” को आगे बढ़ाना है।

स्थानीय लोग और साधु-संत इन होर्डिंग्स को लेकर चर्चा कर रहे हैं। यह संदेश धार्मिक और सामाजिक एकता की आवश्यकता पर जोर देता है, खासकर वक्फ संपत्तियों के मुद्दे को उठाकर इसे बड़ा रूप दिया गया है।

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पीलीभीत एनकाउंटर और पन्नू की धमकी

उधर, 19 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में पंजाब और यूपी पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) के तीन आतंकियों को एनकाउंटर में मार गिराया गया। ये आतंकी 19 दिसंबर को पंजाब के गुरदासपुर में पुलिस चौकी पर ग्रेनेड से हमला करने के बाद भागे थे। एनकाउंटर के बाद खालिस्तानी आतंकी संगठन के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने वीडियो जारी कर धमकी दी।

पन्नू ने कहा कि “महाकुंभ को हिंदू आतंकवाद का आखिरी महाकुंभ बना देंगे” और पीलीभीत में मारे गए आतंकियों को निर्दोष बताया। इसके साथ ही उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया।

महाकुंभ पर आतंकी हमले की धमकी

पन्नू ने प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ में हमले की धमकी देते हुए इसे “बदला लेने का मौका” बताया। उसने मारे गए आतंकियों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये देने का भी ऐलान किया।

इसके अलावा, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के पाकिस्तान स्थित चीफ रंजीत सिंह नीता ने भी फेसबुक पर वीडियो पोस्ट कर यूपी और पंजाब पुलिस को धमकी दी। पुलिस का कहना है कि यह मॉड्यूल अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से संचालित है, जिसमें ग्रीस, जर्मनी और यूके के लोग शामिल हैं।

पुलिस की प्रतिक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था

पन्नू की धमकी के बाद प्रयागराज महाकुंभ की सुरक्षा को लेकर कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने कहा, “पन्नू पहले भी इस तरह की धमकियां देकर पब्लिसिटी स्टंट करता रहा है।” महाकुंभ में सुरक्षा व्यवस्था पहले से चाक-चौबंद है। भारी संख्या में पुलिस बल और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई है।

प्रयागराज और पीलीभीत की घटनाओं का सामंजस्य

महाकुंभ में लगे होर्डिंग्स और पन्नू की धमकी एक साझा संदेश देती हैं—सामाजिक और धार्मिक एकता की आवश्यकता और आतंकी खतरों का सामना करने के लिए सतर्कता। जहां होर्डिंग्स सनातन धर्म के अनुयायियों को एकजुट होने का आह्वान करते हैं, वहीं एनकाउंटर और धमकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी हैं।

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सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि महाकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों को आतंकियों के निशाने पर लेना उनकी साजिश का हिस्सा है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हैं।

निष्कर्ष

महाकुंभ और पीलीभीत की घटनाएं देश की सुरक्षा और सामाजिक संरचना के दो पहलुओं को उजागर करती हैं। जहां धार्मिक आयोजनों को सुरक्षित और सफल बनाना जरूरी है, वहीं आतंकी धमकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना भी अनिवार्य है।