Jantar Mantar Protest: देशभर में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर संसद भवन तक इस मुद्दे पर सियासी घमासान मचा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि सरकार और विपक्ष दोनों ही संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने की बात कह रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सदन में बहस शुरू नहीं हो पा रही। आखिर ऐसा क्यों है? पूरा विवाद संसद के एक खास नियम और राजनीतिक रणनीति के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
सरकार और विपक्ष दोनों चर्चा के पक्ष में
पेपर लीक, परीक्षा सुधार और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों पर सड़क से लेकर संसद तक बहस तेज हो चुकी है। जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन कर रहे हैं, जबकि विपक्ष संसद के भीतर लगातार प्रदर्शन कर रहा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर सरकार पर दबाव बनाया। इसके बाद केंद्र सरकार ने भी साफ कर दिया कि वह इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार है।
बीजेपी ने विपक्ष पर लगाया चर्चा से भागने का आरोप
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि एनडीए सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और संसद में हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी चर्चा से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि सदन में उनके दोहरे रवैये का पर्दाफाश हो जाएगा। नितिन नवीन ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वे संसद में NEET, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े हर मुद्दे पर खुलकर बहस करें।
उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार युवाओं को स्टार्टअप, यूनिकॉर्न और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ा रही है, जबकि विपक्ष सिर्फ युवाओं को आंदोलन की राजनीति में इस्तेमाल करना चाहता है।
राहुल गांधी और विपक्ष की नई शर्त
सरकार के चर्चा के लिए तैयार होने के बाद विपक्ष ने अपना रुख बदल दिया। राहुल गांधी ने मांग रखी कि पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और उसके बाद राज्यसभा के नियम 267 के तहत चर्चा कराई जाए।
सरकार फिलहाल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा देने के पक्ष में नहीं दिख रही है। यही वजह है कि संसद का गतिरोध अब चर्चा कराने पर नहीं बल्कि किस नियम के तहत चर्चा होगी, इस मुद्दे पर आकर अटक गया है।
आखिर क्या चाहता है विपक्ष?
विपक्ष चाहता है कि संसद की पूरी कार्यवाही रोककर केवल पेपर लीक के मुद्दे पर विशेष चर्चा कराई जाए।
इसके लिए विपक्ष नियम 267 (स्थगन प्रस्ताव) के तहत बहस की मांग कर रहा है। विपक्ष का तर्क है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर और आपातकालीन है, इसलिए इसे सामान्य चर्चा में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार किस नियम के तहत चर्चा चाहती है?
सरकार ने साफ किया है कि वह पेपर लीक पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है। सरकार चाहती है कि सामान्य संसदीय नियमों के तहत चर्चा हो, जहां विपक्ष जितना चाहे सवाल पूछ सकता है और सरकार उनका जवाब देगी।
सरकार का मानना है कि सदन की तय कार्यसूची को पूरी तरह रोकना उचित नहीं होगा।
चर्चा आखिर क्यों नहीं हो पा रही?
असल विवाद चर्चा कराने को लेकर नहीं बल्कि उसके तरीके को लेकर है।
- विपक्ष नियम 267 के तहत विशेष चर्चा चाहता है।
- सरकार सामान्य नियमों के तहत चर्चा कराना चाहती है।
- विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है।
- सरकार इस्तीफा देने के पक्ष में नहीं है।
इन्हीं कारणों से संसद में लगातार गतिरोध बना हुआ है।
खड़गे, नड्डा और रिजिजू ने क्या कहा?
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट कहा कि पहले शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, उसके बाद ही चर्चा होगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि विपक्ष नियम 267 के तहत ही बहस चाहता है।
वहीं, राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी विपक्ष चर्चा से पहले शर्तें रखता है तो साफ हो जाता है कि वह वास्तव में बहस नहीं चाहता।
नियम 267 पर इतना जोर क्यों?
पूरा विवाद अब राज्यसभा के नियम 267 पर आकर टिक गया है।
इस नियम के तहत यदि सभापति किसी विषय पर चर्चा की अनुमति दे देते हैं तो उस दिन प्रश्नकाल, शून्यकाल और बाकी सभी सरकारी कामकाज स्थगित हो जाते हैं। पूरे दिन केवल उसी विषय पर चर्चा होती है।
यही वजह है कि विपक्ष चाहता है कि पूरे देश का ध्यान केवल पेपर लीक के मुद्दे पर रहे।
नियम 267 के पीछे राजनीतिक रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ संसदीय नियमों का विवाद नहीं बल्कि राजनीतिक नैरेटिव और क्रेडिट की लड़ाई भी है।
यदि सरकार नियम 267 के तहत चर्चा मान लेती है तो विपक्ष इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत बताएगा और यह संदेश जाएगा कि सरकार विपक्ष के दबाव में झुकी।
दूसरी ओर सरकार ऐसा संदेश नहीं देना चाहती। सरकार सामान्य चर्चा में अपनी उपलब्धियां भी गिना सकती है और पिछली सरकारों की नीतियों पर सवाल उठा सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार ने क्या बताया?
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह के अनुसार नियम 267 के तहत चर्चा होने पर विपक्ष छात्रों के आंदोलन और कथित लाठीचार्ज जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा सकेगा।
उन्होंने बताया कि इस तरह की चर्चा के बाद वोटिंग का भी प्रावधान होता है। इससे यह साफ हो जाता है कि कौन-सा दल किस पक्ष में खड़ा है। विपक्ष इसी वजह से इस नियम पर जोर दे रहा है ताकि छात्रों तक राजनीतिक दलों का रुख साफ संदेश के रूप में पहुंचे।
पहले भी कई बार लागू हो चुका है नियम 267
अरविंद कुमार सिंह के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब नियम 267 के तहत चर्चा की मांग की गई हो।
- एनडीए सरकार के दौरान नोटबंदी पर भी इस नियम के तहत चर्चा हुई थी।
- यूपीए सरकार के समय भी विपक्ष की मांग पर नियम 267 के तहत बहस कराई गई थी।
- अब तक लगभग छह से सात बार इस विशेष नियम के तहत राज्यसभा में चर्चा हो चुकी है।
नियम 267 क्या है?
राज्यसभा की नियमावली का नियम 267 स्थगन प्रस्ताव से जुड़ा प्रावधान है।
यदि सभापति इसकी अनुमति देते हैं तो उस दिन की पूरी कार्यसूची रोक दी जाती है। प्रश्नकाल, शून्यकाल और अन्य सभी सरकारी कार्य स्थगित हो जाते हैं और सदन में केवल उसी मुद्दे पर चर्चा होती है जिसके लिए नोटिस स्वीकार किया गया हो।